गुरुवार, 27 मई, 2004 को 18:51 GMT तक के समाचार
बाल न पकें इसके लिए लोग लाख जतन करते हैं मगर सारी मेहनत कभी-न-कभी धरी की धरी रही ही जाती है और बाल पक जाते हैं.
कुछ की जल्दी हो, कुछ की बाद में, मगर बालों की सफेदी को रोकना लगभग असंभव सा काम समझा जाता रहा है.
लेकिन कहा जाता है कि विज्ञान असंभव को संभव कर डालने वाली विधा है.
तो फ्रांस के ऐसे ही कुछ वैज्ञानिकों ने ना केवल बालों को पकने से रोकने बल्कि पके बालों को दोबारा उनके असल रंग में बदल डाने का रास्ता निकाल लिया है.
फ्रांस की कॉस्मेटिक्स कंपनी लॉरिएल के वैज्ञानिकों ने जीनों के ऐसे जोड़े का पता लगाया है जो शायद बालों को पकाने में सबसे अहम भूमिका निभाने हैं.
शोध
वैज्ञानिकों के अनुसार बाल पकने की जड़ मानी जानेवाली इन जीनों से ये पता लग सकता है कि बालों को असल रंग देनेवाली कोशिकाएँ कितने समय तक ज़िंदा रहती हैं.
बाल तभी पकते हैं जब ये कोशिकाएँ मर जाती हैं.
मगर फ्रांस के वैज्ञानिकों ने ये पाया कि मेलैनोसाइट्स नाम की इन कोशिकाओं में से कुछ कोशिकाएँ बालों के पक जाने के बाद भी जीवित रहती हैं.
इस शोध का नेतृत्व करनेवाले वैज्ञानिक डॉक्टर ब्रूनो बर्नार्ड ने कहा,"हमने पाया कि बालों का पकना इन जीनों की संख्या के घटने से जुड़ी है और हम समझते हैं कि अगर हम इनका क्षय रोक सकें तो बालों का पकना रूक सकता है".
उन्होंने बताया कि इस शोध में अभी काफ़ी कुछ किया जाना बाक़ी है मगर पके बालों के इलाज की दिशा में ये एक प्रभावकारी क़दम हो सकता है.
इस शोध के कुछ नतीजे लंदन के नैचुरल हिस्ट्री म्युज़ियम में जारी किए गए जहाँ 26 सितंबर तक एक प्रदर्शनी में इन्हें रखा जाएगा.