अल्बर्ट आइंस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत के परीक्षण के लिए एक उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में छोड़ा गया है.
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का उपग्रह मंगलवार को कैलीफ़ोर्निया स्थित वैंडेनवर्ग एयर बेस से डेल्टा-2 रॉकेट के सहारे छोड़ा गया.
ग्रैविटी प्रोब-बी नामक उपग्रह साल भर से ज़्यादा समय तक धरती की परिक्रमा करेगा.
इसे अब तक का सबसे जटिल वैज्ञानिक उपकरण बताया जाता है.
यह अंतरिक्ष और समय तथा इन पर धरती के प्रभावों के बारे में आइंस्टाइन के विचारों की पड़ताल करेगा.
आइंस्टाइन ने सापेक्षता या रिलेटिविटी के अपने सिद्धांत में कहा था कि समय और स्थान या टाइम एंड स्पेस पर विशाल ब्रह्मांडीय पिंडों का प्रभाव पड़ता है.
इस सिद्धांत के अनुसार हमारी धरती भी गुरुत्वाकर्षण के सहारे अपने आसपास समय और अंतरिक्ष पर असर डालती है.
सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के नाम से जाने वाले इस सिद्धांत की अभी तक प्रायोगिक पुष्टि नहीं की जा सकी है. अब वैज्ञानिक ग्रैविटी प्रोब-बी के ज़रिए यही करने का प्रयास कर रहे हैं.
क्रिस्टल बॉल
तकनीकी कारणों से ग्रैविटी प्रोब-बी को निर्धारित समय से 24 घंटे बाद छोड़ा जा सका.
उपग्रह को धरती से 400 मील ऊपर ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जा रहा है.
उपग्रह अपने साथ चार जाइरोस्कोप यंत्र ले गया है, जिसमें टेनिस बॉल आकार की क्रिस्टल की एक-एक गेंद है.
![]() ग्रैविटी प्रोब-बी मिशन पर 70 करोड़ डॉलर का ख़र्च आया है |
वैज्ञानिकों के अनुसार इन गेंदों जैसी गोल वस्तु आज तक नहीं बनाई जा सकी है.
वैकम फ़्लास्क या बिना गैस वाली नलियों में मौजूद इन गेंदों को परम शून्य तापमान पर रखा जाएगा.
अंतरिक्ष में इन गेंदों को घुमाने की व्यवस्था है. यदि आइंस्टाइन का सिद्धांत सही रहा तो गेंदों के घूर्णन अक्ष या एक्सिस में बदलाव देखने को मिलेगा.
वैज्ञानिकों ने गेंदों की गति में किसी तरह के बदलाव पर नज़र रखने की पूरी व्यवस्था कर रखी है.
आइंस्टाइन के 1916 में दिए गए सिद्धांत को इस तरह परखने की योजना अब से 45 साल पहले शुरू हुई थी.
यदि सब कुछ योजनानुसार चला तो ग्रैविटी प्रोब-बी का मिशन सवा साल में पूरा हो जाएगा.
इस पर 70 करोड़ डॉलर का ख़र्च आया है.