यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि मंगल की सतह पर उसे पानी के प्रत्यक्ष प्रमाण मिले हैं.
मार्स प्रोब के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने मंगल के दक्षिणी हिस्से में बर्फ का भी पता लगाया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि लेकिन पानी के संकेतों की पुष्टि हो गई है.
उनका कहना है कि कैमरे ने इंफ्रा रेड तकनीक से पानी का पता लगाकर पानी की तस्वीरें भेजीं हैं.
दूसरी ओर अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें अमरीकी रोबोट रोवर स्पिरिट से कुछ सूचनाएँ भेजीं हैं.
गुरुवार को स्पिरिट का संपर्क नासा से टूट गया था.
संपर्क टूटने के बाद से स्पिरिट ने मंगल ग्रह से तस्वीरें भेजनी बंद कर दी थीं और नासा से स्पिरिट को निर्देश देना भी संभव नहीं हो पा रहा था.
नासा का कहना था कि इसकी वजह ऊर्जा में आ रही रुकावट, सॉफ्टवेयर की कोई ख़राबी हो सकती है.
स्पिरिट इसी महीने की शुरुआत में मंगल ग्रह पर पहुँचा था और दस दिन बाद 15 जनवरी को उसने काम करना शुरु किया था.
रोवर स्पिरिट सिरीज़ का दूसरा रोबट अपॉर्चुनिटी 25 जनवरी की शाम को मंगल पर पहुँचने वाला है.
जीवन
इसके पहले 'मार्स ऑब्ज़र्वर' और 'मार्स पोलर लैंडर' अंतरिक्ष यान से भी इस तथ्य का पता लगाने की कोशिश की गई थी.
वैज्ञानिकों का आकलन है कि इससे इस तथ्य को बल मिलता है कि मंगल की सतह अब से कहीं ज़्यादा नम और गर्म थी.
वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी का मिलना बेहद उत्साहजनक संकेत हैं क्योंकि इसका अर्थ है जीवन.
इसके पहले दो अंतरिक्ष यान वाइकिंग एक और दो मंगल पर गए थे और उनसे प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया था कि वहाँ जीवन के संकेत नज़र नहीं आते हैं.