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मोटापा कम करने की योजना में देरी

संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर में मोटापा कम करने के लिए कुछ दिन पहले एक नीति तैयार की है जिसमें कहा गया है कि नमक, चर्बी बढ़ाने वाली चीज़ें और चीनी कम मात्रा में लेनी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इनसे मोटापा बढ़ता है और नतीजतन बहुत सी बीमारियाँ होने का डर बढ़ जाता है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मोटापे से दिल की बीमारियाँ, डायबटीज़ और जान के लिए ख़तरा बनने वाली अन्य बीमारियाँ हो जाती हैं.

इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर में मोटापा कम करने की मुहिम शुरू की है.

इस बारे में तैयार किए गए एक दस्तावेज़ को जेनेवा में मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक बैठक में भारी समर्थन मिला लेकिन अमरीकी विरोध की वजह से इसे मंज़ूरी नहीं दी जा सकी.

अमरीका के अनुरोध पर अब देशों को इस योजना में परिवर्तन सुझाने के लिए मई तक का समय दिया गया है.

मई में होने वाले सम्मेलन में इस मंज़ूरी देकर लागू कर दिया जाएगा और इस सम्मेलन में 192 देश भाग लेंगे.

कितना मोटापा

अनुमान लगाया जाता है कि दुनिया भर में क़रीब तीस करोड़ लोग मोटापे के शिकार हैं और क़रीब 75 करोड़ लोगों का वज़न ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ चुका है.

लेकिन अमरीका को इस मुहिम पर ऐतराज़ है. उसका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र अपने इस बयान पर फिर से विचार करे कि चीनी आदमी का मोटापा बढ़ाती है.

इस ऐतराज़ की वजह यह बताई जा रही है कि अमरीका में चीनी उद्योग का सरकार पर दबाव है कि अगर चीनी को रोज़मर्रा के खाने में शामिल करने से मना कर दिया जाता है तो चीनी उद्योग भारी असर पड़ेगा.

संयुक्त राष्ट्र की नीति में खाद्य पदार्थों के उत्पादन से जुड़े उद्योगों से यह भी कहा गया है कि वे खाने-पीने की चीज़ों में चीनी की मात्रा घटा दें.

ऐसे में अमरीका का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र का यह कहना वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है कि चीनी मोटापा बढ़ाती है.

हालाँकि इस मामले में अमरीकी प्रशासन पर यह आरोप लगाया जाता है कि चीनी उद्योग के दबाव में असल मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है.

फिलहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अमरीका का वह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है जिसमें संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज़ में परिवर्तन सुझाने के लिए और समय दिए जाने की बात कही गई है.