लंबे समय से ये जानने की कोशिशें चलती रही हैं कि पृथ्वी के बाहर जीवन है या नहीं.
इसी दौरान कई खोजों से ये अंदेशा हुआ कि शायद मंगल ग्रह पर जीवन है.
हमारे वैज्ञानिक मंगल ग्रह के बारे में अधिक से अधिक जानने के लिए लगातार अभियान चलाते रहते हैं.
मंगल ग्रह पर अभियानों की सफलता के लिए अब पृथ्वी पर ही एक ऐसे द्वीप की खोज की गई है जहाँ की स्थितियाँ मंगल से मिलती-जुलती हैं.
इस द्वीप के ज़रिए मंगल में जाकर खोज करने की तैयारियाँ की जा रहीं हैं.
कनाडा के उत्तर में स्थित धरती के इस मंगल का नाम है 'डेवोन'.
क़रीब 24 किलोमीटर में फैले इस द्वीप का अधिकांश हिस्सा ध्रुवीय मरूस्थल का है.
वहाँ न तो कोई रहता है और न ही किसी तरह के पेड़ पौधे हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि क़रीब ढाई सौ साल पहले इस द्वीप से जीवन ख़त्म हो गया था और वहाँ मंगल ग्रह की तरह स्थितियाँ बन गईं.
मार्स सोसायटी
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने 1997 में डेवोन द्वीप को अच्छी तरह से समझने की कोशिश शुरू की ताकि वे मंगल ग्रह के बारे में धरती पर रहते ही कुछ तुलनात्मक अध्ययन कर सकें.
इसी अभियान को और व्यवस्थित करने के लिए 1998 में बनी 'मार्स सोसायटी' यानी मंगल समाज.
'मार्स सोसायटी' ने तय किया कि इस अभियान के तहत डेवोन का भूगर्भीय अध्ययन किया जाएगा और वो भी उन्हीं तरीकों से जो मंगल ग्रह पर अपनाए जाते हैं.
साथ ही ऐसी परिस्थितियाँ बनाने की भी कोशिशें की गईं जिनका सामना मंगल ग्रह में करना पड़ता है.
और इस तरह शुरूआत की गई ऐसे विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण की जो मंगल ग्रह के अभियानों में अधिक सक्षम सिद्ध हो सकें.
पक्के इरादे
वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि इस कोशिश से मंगल ग्रह के बारे में वे अधिक से अधिक जानकारी पाने में सफल होंगे.
मार्स सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. रॉबर्ट ज़्युब्रिन का कहना है," हमें इस अभियान में कई तरह की मुश्किलों का सामना भी करना पड़ रहा है लेकिन हमारे इरादे पक्के हैं."
इस महत्वपूर्ण अभियान में 20 देशों के क़रीब 150 वैज्ञानिक लगे हैं.
मंगल को पृथ्वी पर समझने की कोशिश करने वाले इस रोचक अभियान में कई महत्त्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी मिल रही है.
अब रोमाँच इस बात का है कि मंगल ग्रह के रहस्यों को जानने के लिए धरती का मंगल कितना कारगर सिद्ध हो पाता है.