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मैडकाउ डिज़ीज़ क्या है?

मैडकाउ डिज़ीज़ को वैज्ञानिक शब्दावली में बोविन स्पोंजीफॉर्म इन्सेफलोपैथी या बीएसई कहते हैं.

ये बीमारी दिमाग़ पर असर करती है और पशु अपनी दिमाग़ी संतुलन खो देता है और इससे मौत भी हो सकती है.

कैसे फ़ैलती है मैडकाउ डिज़ीज़?

एक दशक के शोध के बाद भी मैडकाउ कैसे फैलती है इसके बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है.

मैडकाउ जानवरों में फैलती है लेकिन इससे मिलती-जुलती बीमारी मानव में भी फैलती पाई गई है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि मैडकाउ का मामला सबसे पहले 1984 में देखा गया था.

इसकी शुरूआत की वजह एक अन्य दिमाग़ी बीमारी 'स्क्रेपी' से ग्रस्त एक भेड़ के बचे-खुचे हिस्से के साथ सामान्य भेड़ के चरने से मानी जाती है.

मैडकाउ का मानव से क्या संबंध है?

मैडकाउ से मिलती-जुलती बीमारी क्रुट्सफैल्ट जैकब डिज़ीज़ या सीजेडी मानव में पाई जाती है.

मैडकाउ से ग्रस्त गाय का माँस खाने से ये बीमारी हो जाती है.

इस बीमारी से ब्रिटेन में अब तक सौ से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

सीजेडी के लक्षण प्रगट होने से मौत होने तक छह महीने का समय लग सकता है.

प्रोटीन की भूमिका?

वैज्ञानिकों का मानना है कि मैडकाउ का एक विशेष परिवर्तनीय प्रोटीन प्रायोन के संक्रमित हो जाने से भी संबंध है.

लेकिन इस प्रोटीन में क्या बदलाव आ जाता है और ये कैसे मैडकाउ के विस्तार में मदद करता है, ये अभी तक स्पष्ट नहीं है.

लेकिन ये देखा गया है कि संक्रमित प्रायोन के सामान्य पशु के खाने पर वो भी इस रोग से संक्रमित हो जाता है.