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बीगल2 का सफ़रनामा

किसी दूसरे ग्रह के लिए यूरोप का पहला अंतरिक्ष अभियान मार्स एक्सप्रेस पृथ्वी से छूटने के छह महीने बाद अब मंगल ग्रह पर पहुँच रहा है.

ब्रितानी बीगल2 अंतरिक्षयान 19 दिसंबर को मार्स एक्सप्रेस से अलग हुआ था और क्रिसमस वाले दिन ये मंगल पर पहुँच रहा है.

इस अभियान पर नज़र रख रहे नियंत्रक इस अंतरिक्षयान को करोड़ों किलोमीटर दूर से जर्मनी के यूरोपियन स्पेस ऑपरेशंस सेंटर से निर्देश देंगे.

यदि सब कुछ ठीक ढंग से हुआ तो ये अभियान कुछ इस तरह पूरा होगा-

16 दिसंबर

मार्स एक्सप्रेस की स्थिति की ठीक ढंग से जाँच-परख हुई. इसकी स्थिति बिल्कुल इस तरह से होनी थी जिससे बीगल2 ठीक तरह से निकले और मंगल पर पहुँचे.

18 दिसंबर

मंगल पर पहुँचने के लिए सारे मानदंड निर्धारित कर दिए गए.

19 दिसंबर, 0650 ग्रीनिच मान समय

यूरोपीय स्पेस एजेंसी अभियान के नियंत्रकों ने बीगल2 को मार्स एक्सप्रेस से अलग करने का अंतिम फ़ैसला किया.

19 दिसंबर, 0831 ग्रीनिच मान समय

मार्स एक्सप्रेस को एक संदेश भेजा गया जिससे वह बीगल2 को अलग करके प्रक्षेपित कर सके. बीगल2 में अपना कोई इंजन नहीं है.

19 दिसंबर 1031 ग्रीनिच मान समय

अभियान के नियंत्रकों ने मार्स एक्सप्रेस से मिले आँकड़ों के आधार पर कहा कि बीगल2 का मार्स एक्सप्रेस से अलग होना सफल रहा.

वहाँ लगे एक कैमरे ने बीगल2 की एक तस्वीर ली जिसमें उसे अंतरिक्ष यान से अलग होते दिखाया गया.

20 दिसंबर, 0800 ग्रीनिच मान समय

मार्स एक्सप्रेस में कई ऐसी व्यवस्थाएँ की गईं जिससे अंतरिक्षयान मंगल के ऑर्बिट में भेजा जा सके.

25 दिसंबर, 0000 ग्रीनिच मान समय

बीगल2 का एक स्विच इसके सॉफ़्टवेयर को सक्रिय कर देगा जिससे वह मंगल के वातावरण में प्रवेश करने और उतरने के लिए तैयार हो सके.

25 दिसंबर, 0248 ग्रीनिच मान समय

बीगल2 मंगल के इर्द-गिर्द के वातावरण में प्रवेश करेगा. अंतरिक्षयान को गर्मी से बचाने वाला कवच उसकी रक्षा को तैयार होगा.

ऊपरी वातावरण की गैसों से संपर्क में आने के बाद बीगल2 की गति धीमी हो जाती है. एक बार जब इसकी गति 1600 किलोमीटर प्रति घंटे से कम हो जाती है तो दो पैराशूट इसे और धीमा कर देते हैं.

एक रडार संकेत देगा कि बीगल2 सतह से सिर्फ़ 200 मीटर ही दूर है. गैस से भरने वाले बड़े एयरबैग फूल जाते हैं जिससे अंतरिक्षयान जब सतह पर पहुँचे तो उसे कोई नुक़सान नहीं हो.

25 दिसंबर 0254 ग्रीनिच मान समय

बीगल2 के लिए महत्त्वपूर्ण समय. सब कुछ यदि तय कार्यक्रम के हिसाब से ही हुआ तो वह सतह को छू लेगा और वह निश्चित जगह पर जाकर रुक जाएगा.

25 दिसंबर 0300 ग्रीनिच मान समय

मार्स एक्सप्रेस मंगल के ऑर्बिट में चला जाएगा. इसकी गति धीमी होकर लगभग नौ किलोमीटर प्रतिघंटे तक हो जाती है.

25 दिसंबर 0830 ग्रीनिच मान समय

पहली बार ये पता लगेगा कि मार्स एक्सप्रेस सही सलामत ऑर्बिट में पहुँच गया है या नहीं.

26, 27, 28 दिसंबर

मार्स एक्सप्रेस के ऑर्बिट में कुछ और सुधार किए जाएँगे. ये ऑर्बिट कुछ इस तरह का होगा जिससे एक समय तो मार्स एक्सप्रेस मंगल की सतह से 260 किलोमीटर की दूरी पर होगा और दूसरे समय 11,000 किलोमीटर की दूरी पर.