सौ साल से ग़ायब छोटी-सी चिड़िया वार्बलर को लुप्तप्राय मान लिया गया था. लेकिन अब फ़िजी के जंगलों में न सिर्फ उसे देखा गया है, बल्कि उसकी सुरीली आवाज़ भी नहीं बदली है.
बर्डलाइफ़ इंटरनेशनल संस्था के वैज्ञानिकों के एक दल ने 12 वार्बलर युगल का पता लगाया है.
हालाँकि उन्होंने कहा है कि जंगलों की कटाई और लंगूरों से इन सुंदर चिड़ियों को बहुत ख़तरा है.
इससे पहले 1890 और 1894 के बीच मात्र चार वार्बलर चिड़ियों को देखा गया था.
पिछले दो दशकों में इसे कहीं-कहीं देखे जाने की ख़बर आती रही हैं, लेकिन इस संबंध में कभी कोई पुख़्ता प्रमाण सामने नहीं आए.
बर्डलाइफ़ इंटरनेशनल संस्था ने इसे लुप्त प्रजाति मान लिया था.
ब्रिटेन के डार्विन इनीसिएटिव नामक संस्था की ओर से किए गए सर्वेक्षण में फ़िजी के सबसे बड़े द्वीप विति लेवु पर वार्बलर नज़र आईं.
पहली बार विलिकेसा मासिबलावु की नज़र इन पर पड़ी. उन्होंने कहा, "मैंने तेज़ स्वर में इन्हें गाते सुना. आवाज़ फ़िजी की बाकी चिड़ियों से बिल्कुल अलग थी."
मासिबलावु के सहयोगी गाय डटसन कहते हैं, "लंबी टांगों वाली वार्बलर चिड़िया छुप-छुप कर रहने वाली चिड़ियों की प्रजाति से है. लेकिन अब जबकि हमने इनकी आवाज़ को पहचान ली है, इन्हें आसानी से ढूँढा जा सकेगा और इनके संरक्षण की योजनाएँ बनाई जा सकेंगी."