केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज का कहना है कि सरकार अब एड्स पीड़ित बच्चों को ऐंटीरेट्रोवायरल दवाएँ मुफ़्त देने का अभियान शुरू करेगी.
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार लोगों को ऐंटीरेट्रोवायरल ड्रग मुहैया कराने की पूरी कोशिश की जाएगी मगर दवा इतनी महँगी है कि उसके साथ ही अन्य चीज़ों पर भी ख़ास ध्यान देना होगा.
स्वराज ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा कि जिन बच्चों के माँ-बाप एड्स का शिकार हो कर मर गए और बच्चों को भी एड्स है तो सरकार उन्हें ऐंटीरेट्रोवायरल दवाएँ मुहैया कराएगी.
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, "जिन अभिभावकों का बच्चों के लिए जीना ज़रूरी है उन्हें भी ये दवा सरकार उपलब्ध कराएगी."
उन्होंने कहा, "मैं इन दवाओं के दाम कम कराने के बारे में दवा निर्माताओं से बात करना चाहूँगी."
उन्होंने कॉरपोरेट जगत से अपील की कि वह एड्स की वजह से माँ-बाप की मौत के बाद अनाथ हुए बच्चों को पाँच या दस साल के लिए अपनाने के लिए आगे आएँ.
स्वराज के अनुसार, "सरकार एड्स के बचाव का कार्यक्रम दूसरे स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ मिलाकर चलाने की तैयारी की जा रही है."
इसके तहत एड्स कार्यक्रम को रिप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ या आरसीएच और टीबी कार्यक्रम के साथ चलाने की योजना बनाई गई है.
उन्होंने बताया कि कॉन्डम के बारे में लोगों को जागरूक बनाने के साथ ही कुछ जगहों पर उनकी उपलब्धता बढ़ाना भी एक महत्त्वपूर्ण क़दम होगा और उसके बारे में ग़ैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है.
ऐंटीरेट्रोवायरल ड्रग
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, "पहले चरण में तो सरकार ने जागरूकता बढ़ाने पर ही ज़ोर दिया मगर दूसरे चरण में लोगों की ऐंटीरेट्रोवायरल ड्रग तक पहुँच बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा."
अस्पताल में सुविधाओं और डॉक्टरों के बीच मौजूद भ्रांतियों के बारे में स्वराज का कहना था कि इस बारे में डॉक्टरों को समझाने की कोशिश की गई है कि वे किसी तरह का भेदभाव नहीं करें.
जागरूकता कार्यक्रम के बावजूद एड्स पीड़ित लोगों के सामाजिक तिरस्कार के बारे में उनका कहना था कि अब तक लोगों को जानकारी तो दी जाती थी मगर अब पूरी जानकारी देने की योजना है.
उन्होंने कहा, "नए तरह के विज्ञापनों के ज़रिए लोगों को एड्स के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश हो रही है."
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार लोगों को पूरी जानकारी मिलने के बाद अब वे लोग इस तरह की सोच से बाहर निकल रहे हैं.
कॉन्डम का इस्तेमाल बढ़ाने के बारे में भा अब बहुत ध्यान से कार्यक्रम चलाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि ग़ैर-सरकारी संगठनों से कह दिया गया है कि वे सभी क्षेत्रों पर ध्यान देने के बजाए किसी एक पर ही ध्यान केंद्रित करें और यौनकर्मियों, युवाओं या ट्रक चालकों में से किसी एक के बीच जागरूकता फैलाएँ और परिणाम दिखाएँ.