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लंबी नाक वाला चमकीला बैंगनी मेंढक

भारत के सहयाद्रि क्षेत्र में सात इंच की लंबाई वाला बैंगनी रंग का एक चमकदार मेंढक पाया गया है.

इस अनोखे मेंढक की ख़ोज से वैज्ञानिक ख़ासे उत्साहित हैं.

इस मेंढक का नथुना नुकीला है.

ये नाम संस्कृत से लिया गया है.

दरअसल, संस्कृत में नाक को नसिका और मेंढक को बत्राचु कहते हैं.

सहयाद्रि उस पहाड़ी क्षेत्र का नाम है जहाँ ये मेंढक पाया गया.

इस मेंढक का सिर उसके शरीर के अनुपात में काफ़ी छोटा दिखता है.

देखने में ये मेंढक जन्तु नहीं बल्कि को छोटा मोटा सा वस्तु दिखता है.

वैज्ञानिक इसे एक महत्वपूर्ण ख़ोज इसलिए मान रहे हैं क्योंकि उन्हें आशा है कि ये मेंढक पृथ्वी के इतिहास के कुछ ऐसे पन्नों को उलटने में मदद कर सकता है जो अब तक अनजाने हैं.

बेल्जियम के फ़्री विश्वविद्यालय के फ़्रैंकी बोसुये का कहना है," ये एक महत्वपूर्ण खोज इसलिए भी है क्योंकि इससे मेंढकों की आधुनिक प्रजातियों की प्राचीन जड़ों के बारे में पता लग सकता है."

बोसुये के साथ साथ केरल के ट्रॉपिकल बोटानिक गार्डन और अनुसंधान केंद्र के एसडी बिजु का मानना है कि सहयाद्रेंसिस सेशेल्स में पाए जाने वाली मेंढक की एक प्रजाति सुग्लोस्सिडे से संबंधित है.

इस बैंगनी मेंढक की डीएनए जाँच से ये पता लगा है कि इससे मिलते-जुलते पूर्वज मेंढक कम से कम 13 करोड़ वर्षों पहले हुए होंगे.

सेशेल्स में पाए जाने वाली मेंढक प्रजाति सुग्लोस्सिडे के बारे में ये अटकलें लगतीं रहीं हैं कि इसके सबसे क़रीबी रिश्तेदार कभी भारत में रहे होंगे और फिर विलुप्त हो गए.

लेकिन इस चककदार, बैंगनी मेंढक ने सिर्फ़ जंतु वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि प्रकृति के रहस्यों में रुचि रखने वाले सभी लोगों को चौंका दिया है.