चीन ने 15 अक्टूबर को अतंरिक्ष में अपने पहले यात्री को भेजने की घोषणा की है.
यदि ये उड़ान सफल रही तो चीन अंतरिक्ष में 'तैकोनॉट' यानी अंतरिक्ष यात्री भेजनेवाला तीसरा देश बन जाएगा.
अब तक केवल अमरीका और रूस के पास ही मानव को अंतरिक्ष में भेज पाने की विशेषज्ञता हासिल है.
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 90 मिनट की इस उड़ान में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा का एक चक्कर लगाएँगे.
लेकिन अभी इस बात की घोषणा नहीं की गई है कि चीन की ओर से अंतरिक्ष में जानेवाला पहला अंतरिक्ष यात्री कौन होगा.
चीन से अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले इस मानव को 'तैकोनॉट' कहा जा रहा है.
ठीक उसी तरह जैसे कि अंतरिक्ष जाने वालों को रूस में 'कॉस्मॉनॉट' और अमरीका में 'ऐस्ट्रॉनॉट' कहा जाता है.
पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष यान भेजने का सफल प्रक्षेपण किया गया था.
चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को बहुत महत्व दे रहा है. लेकिन अभी वह अमरीका और रूस से बहुत पीछे है.
चीन ने अंतरिक्ष यान का पहला परीक्षण नवंबर 1999 में किया गया था और यह बारह घंटे तक अंतरिक्ष में रहने के बाद धरती पर लौटा था.
इसके बाद जनवरी, 2001 में एक और यान अंतरिक्ष में भेजा गया था.
माना जाता है कि चीनी अंतरिक्ष यान रूसी तकनीक पर आधारित हैं लेकिन चीन के इंजीनियरों ने इसमें भारी फेरबदल किए हैं.