दिल्ली से चेन्नई तक
भारतीय शहर क्यों गर्म होते जा रहे?
भारत के शहर ज़्यादा गर्म होते जा रहे हैं. लेकिन इन शहरों में रहने वाला हर इंसान, गर्मी को एक जैसा महसूस नहीं करता.
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) से मिली लैंडसैट सैटेलाइट तस्वीरों के एक एनालिसिस से पता चलता है कि एक ही शहर के अलग-अलग इलाकों में ज़मीन के तापमान में बहुत ज़्यादा फ़र्क है. लैंडसैट, नासा और यूएसजीएस का एक साझा मिशन है जो पृथ्वी की ज़मीन की सतह की तस्वीरें देता है.
तस्वीरों से पता चलता है कि जिन इलाकों में इमारतों का जाल सा बिछा है और कंक्रीट ज़्यादा हैं, वहां ज़मीन की सतह, पार्कों, पेड़ों या पानी के स्रोतों के आस-पास की जगहों के मुकाबले कहीं ज़्यादा गर्म थी.
यह बात इसलिए अहम है क्योंकि वर्ल्ड बैंक तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की शहरी आबादी 2020 में 48 करोड़ थी और 2050 तक यह बढ़कर करीब 95 करोड़ हो सकती है.
इसके अलावा कई लोगों के लिए गर्मी से बच पाना बहुत मुश्किल है. शहरों में रहने वाले सिर्फ़ 12.6 फीसदी परिवारों के पास ही एसी (एयर कंडीशनर) है. वहीं 22 फीसदी परिवारों के पास कूलर है.
शहर क्यों गर्म हो रहे हैं
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पिछले दो दशकों में भारतीय शहरों का तेज़ी से विस्तार हुआ है. निर्माण वाले क्षेत्र बढ़े हैं. वहीं कई जगहों पर हरियाली, खेती की ज़मीन और खुली जगहें कम हो गई हैं.
सड़कें, इमारतें और अन्य बुनियादी ढांचे, जंगलों, खेतों या जलाशयों की तुलना में गर्मी को बढ़ाते हैं. यही वजह है कि शहर अक्सर अपने आस-पास के इलाकों की तुलना में ज़्यादा गर्म हो जाते हैं. इसे 'अर्बन हीट आइलैंड इफ़ेक्ट' के नाम से जाना जाता है.
2024 के 'नेचर सिटीज़' स्टडी में पाया गया कि 2003 से 2020 के बीच भारत के शहरों का तापमान देश के बाकी हिस्सों की तुलना में लगभग दोगुनी तेज़ी से बढ़ा. इस तापमान वृद्धि में शहरीकरण का योगदान लगभग 38% रहा.
पिछले दो दशकों में शहर का विस्तार कैसे हुआ है.
ये मैप 2000 और 2020 के बीच {{city-name}} के निर्माण क्षेत्र में हुए विस्तार को दिखाते हैं. इनमें इंसानों के बनाए ढांचे शामिल हैं, जैसे घर, व्यावसायिक इमारतें, औद्योगिक स्थल और पक्की सड़कें.
ये मैप 2000 और 2020 के बीच {{city-name}} के निर्माण क्षेत्र में हुए विस्तार को दिखाते हैं. इनमें इंसानों के बनाए ढांचे शामिल हैं, जैसे घर, व्यावसायिक इमारतें, औद्योगिक स्थल और पक्की सड़कें.
ये मैप 2000 और 2020 के बीच {{city-name}} के निर्माण क्षेत्र में हुए विस्तार को दिखाते हैं. इनमें इंसानों के बनाए ढांचे शामिल हैं, जैसे घर, व्यावसायिक इमारतें, औद्योगिक स्थल और पक्की सड़कें.
ये मैप 2000 और 2020 के बीच {{city-name}} के निर्माण क्षेत्र में हुए विस्तार को दिखाते हैं. इनमें इंसानों के बनाए ढांचे शामिल हैं, जैसे घर, व्यावसायिक इमारतें, औद्योगिक स्थल और पक्की सड़कें.
समय के साथ तापमान में किस तरह बढ़ोतरी हुई है
मई 2026 ( अधिकतम तापमान)
मई 2026 ( अधिकतम तापमान)
मई 2026 ( अधिकतम तापमान)
मई 2026 ( न्यूनतम तापमान)
मई 2026 ( न्यूनतम तापमान)
मई 2026 ( अधिकतम तापमान)
ज़मीन की सतह के तापमान के मैप, यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) से ली गई लैंडसैट सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल करके बनाए गए थे. तस्वीरों को उनकी ताज़गी, बादलों की मौजूदगी और जिस दिन तस्वीर ली गई थी, उस दिन हर शहर के तापमान के आधार पर चुना गया था. शहरों के विस्तार का विश्लेषण यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड की ग्लोबल लैंड एनालिसिस और डिस्कवरी लैब के ज़मीन के यूज के डेटा का इस्तेमाल करके किया गया था. शहरों के रोज़ाना के तापमान का डेटा इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट के ग्रिड वाले डेटासेट से लिया गया था. हर शहर के लिए सबसे पहले 1991–2020 के लिए महीने के औसत तापमान को निकाला गया है. आईएमडी इसी समय-सीमा को अपने लॉन्ग पीरियड अवरेज (एलपीए) के लिए रेफरेंस पीरियड के तौर पर इस्तेमाल करता है. इसके बाद हाल के तापमान की तुलना सामान्य तापमान से करने के लिए, 2024, 2025 और 2026 के लिए भी यही गणना दोहराई गई थी.
क्रेडिट्स
मैप्स, डेटा एंड वर्ड्स: जैस्मीन निहलानी
डिजाइन: वासिफ खान, यूजीन चौहान, चेतन सिंह
एनिमेशन: वासिफ खान
डेवलपमेंट: कावेरी बिस्वास और प्रीति वाघेला
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