मंगलवार, 30 जून, 2009 को 06:28 GMT तक के समाचार
बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जाँच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंप दी है.
छह दिसंबर, 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद इस आयोग का गठन किया गया.
उसके बाद 48 बार इसकी अवधि का विस्तार किया गया.
मंगलवार को रिटायर्ड जस्टिस एमएस लिब्रहान ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. इस मौक़े पर गृह मंत्री पी चिदंबरम भी मौजूद थे.
इस रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.
बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के दस दिनों के भीतर ही इस आयोग का गठन किया गया था. यह भारत के इतिहास में सबसे अधिक अवधि वाला जाँच आयोग साबित हुआ.
लंबा कार्यकाल
इस आयोग को इस बात की जाँच करनी थी कि किन परिस्थितियों में बाबरी मस्जिद तोड़ी गई.
इसे 16 मार्च, 1993 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन उसके बाद लगातार इसकी अवधि बढ़ाई जाती रही. इसे पिछला विस्तार पिछले वर्ष मार्च में मिला था.
इस आयोग ने 400 बैठकें कीं और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बयान दर्ज किए थे.
अयोध्या विवाद भारत के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा रहा है और देश की राजनीति को एक लंबे अरसे से प्रभावित करता रहा है.
भारतीय जनता पार्टी और विश्वहिंदू परिषद सहित कई हिंदू संगठनों का दावा है कि हिंदुओं के आराध्य राम का जन्म ठीक वहीं हुआ जहाँ बाबरी मस्जिद थी.
उनका दावा है कि बाबरी मस्जिद दरअसल एक मंदिर को तोड़कर बनवाई गई थी और इसी दावे के कारण छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई.
इसके बाद देश भर में हुए दंगों में हज़ारों लोगों की मौत हो गई थी.