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रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

बर्ख़ास्त पुलिसकर्मी हुए बहाल

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने 18000 से ज़्यादा बर्ख़ास्त पुलिसकर्मियों को बहाल कर दिया है. चयन में अनियमितता का आरोप लगाते हुए इन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया था.

लेकिन मायावती को अपना फ़ैसला बदलना पड़ा क्योंकि हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला शुरू किया था.

लखनऊ में विशेष गृह सचिव डीके गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि तत्काल प्रभाव से 18 हज़ार से ज़्यादा बर्ख़ास्त पुलिसकर्मियों को बहाल किया जा रहा है, लेकिन अदालत के आख़िरी फ़ैसले पर भी सरकार की नज़र रहेगी.

इन पुलिसकर्मियों को सितंबर 2007 में बर्ख़ास्त किया गया था. डीके गुप्ता ने कहा कि चयन में घूस देने और अनियमितता की जाँच की जाएगी और जो दोषी पाया जाएगा, उन्हें हटा दिया जाएगा.

राज्य के विशेष गृह सचिव के मुताबिक़ अदालत ने यह कहा है कि सरकार ने बिना ये जाने सभी नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को हटा दिया कि इनमें से किसकी नियुक्ति ग़लत तरीक़े से हुई है और किसकी नहीं.

अदालत ने यह भी कहा कि सरकार ने इन पुलिसकर्मियों को अपने बचाव का भी मौक़ा नहीं दिया.

जाँच

अब सरकार इसकी जाँच करेगी कि इनमें से कितने पुलिसकर्मी भ्रष्ट तरीक़ों से नियुक्त हुए हैं. ये सभी पुलिसकर्मी समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान नियुक्त हुए थे.

मायावती ने सत्ता संभालते ही नियुक्ति में कथित अनियमितता, घूसखोरी के आरोपों की जाँच कराई और फिर 18 हज़ार से ज़्यादा पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त कर दिया.

कई पुलिस अधिकारियों को भी इस मामले में अपना पद गँवाना पड़ा. लेकिन हाई कोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजा कांत मिश्रा के अधीन जाँच आयोग का गठन ग़ैर क़ानूनी था.

अदालत ने यह भी कहा कि सभी नवनियुक्ति पुलिसकर्मियों को बर्ख़ास्त करना न्याय पाने के सिद्धांत के ख़िलाफ़ है. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अपील दाख़िल की लेकिन अदालत ने हाई कोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाने से मना कर दिया.

हाई कोर्ट ने 27 मई को राज्य के प्रधान सचिव और पुलिस महानिदेशक को अदालत की अवमानना के मामले में समन जारी किया था.

हालाँकि अब ये माना जा रहा है कि अदालत अब अवमानना का मामला ख़त्म कर देगी. क्योंकि राज्य सरकार अब आदेश पर कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपेगी.