सोमवार, 27 अप्रैल, 2009 को 11:45 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के दौरान मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, कई मंत्रियों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ शिकायत की जाँच का आदेश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़किया नसीम एहसान और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड की याचिका पर दिया है.
न्यायमूर्ति अरिजित पसायत और अशोक कुमार गांगुली की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि विशेष जाँच दल (एसआईटी) तीन महीने के अंदर शिकायत की जाँच करके अपनी रिपोर्ट दे.
एसआईटी गुजरात दंगों से जुड़े अन्य कई मामलों की भी जाँच कर रही है. एसआईटी की अगुआई सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन कर रहे हैं.
बीबीसी से बातचीत में समाजसेविका और याचिकाकर्ताओं में से एक तीस्ता सीतलवाड ने इसे दंगा पीड़ितों की एक बड़ी जीत बताया है.
लेकिन दिलचस्प बात ये है कि गुजरात सरकार के वक़ील भी कह रहे हैं कि वो ये जाँच चाहते हैं क्योंकि इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.
एहसान जाफ़री कांग्रेस के पूर्व सांसद थे और गुजरात दंगों के दौरान मारे गए थे. अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में आग लगा दी गई थी, जिसमें एहसान जाफ़री समेत 38 लोग मारे गए थे.
याचिका
एहसान जाफ़री की पत्नी ज़किया नसीम एहसान ने नवंबर 2007 में गुजरात हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे ख़ारिज़ कर दिया था.
उसके बाद ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. तीन मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस भी जारी किया था.
एहसान जाफ़री की पत्नी गुलबर्ग सोसाइटी कांड की प्रत्यक्षदर्शी हैं और उन्होंने अपनी शिकायत में नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के कई मंत्रियों का ज़िक्र किया है.
वर्ष 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के कारण 59 हिंदू मारे गए थे. जिसके बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे.
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे, जिनमें से ज़्यादातर मुसलमान थे.