शुक्रवार, 24 अप्रैल, 2009 को 06:57 GMT तक के समाचार
श्रीलंका सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों को संघर्ष के क्षेत्र में जाने देने की अपील ठुकरा दी है.
इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार से कहा था कि वे संघर्ष विराम करें ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके और लोगों तक सहायता पहुँचाई जा सके.
साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की थी कि वह उत्तरी श्रीलंका में मानवीय दल भेज रहा है जहाँ श्रीलंकाई सेना और तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में लगभग 50 हज़ार लोग फंसे हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने गुरुवार को मानवीय दल तत्काल भेजने की घोषणा की थी.
बान की मून ने कहा,'' इतने लोगों की जाने गईं हैं और औरों को खोने के लिए वक्त नहीं गवांया जा सकता.''
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी परिषद के अमीन अवाद का कहना था,'' नर्क के दरवाज़े खोलें और इन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने दें.''
इस इलाक़े में श्रीलंकाई सेना तमिल विद्रोहियों के बहुत क़रीब पहुँच गई है और उसने उनकी घेराबंदी कर रखी है.
श्रीलंका सरकार का कहना है कि सेना की कार्रवाई के बाद सोमवार से लगभग एक लाख लोग भागे हैं.
इसके पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने श्रीलंका के तमिल विद्रोहियों से तुरंत हथियार डालने को कहा था ताकि संघर्ष वाले इलाक़े में फंसे आम नागरिकों को निकाला जा सके.
भारत ने चिंता जताई
इधर भारत ने श्रीलंका में तमिल नागरिकों की हत्या पर नाख़ुशी ज़ाहिर करते हुए उसे तुरंत रोकने की अपील की है.
भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने श्रीलंका की स्थिति पर विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्री एके एंटनी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन के साथ चर्चा की.
भारत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन को श्रीलंका भेजे रहा है.
प्रणब मुखर्जी ने कहा, " हम श्रीलंका में तमिल नागरिकों की लगातार हो रही हत्याओं से काफ़ी नाख़ुश हैं. ये रोकी जानी चाहिए."
भारत ने श्रीलंका सरकार से कहा है कि अपने नागरिकों को बचाने की ज़िम्मेदारी उसकी है.
इसके साथ ही तमिल विद्रोही संगठन से भी भारत ने कहा है कि वो नागरिकों को बंधक बनाए रखने की कोशिश बंद करे.
उधर श्रीलंका की स्थिति पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कराट ने गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि भारत सरकार को चाहिए कि श्रीलंकाई सरकार पर दबाव बनाए ताकि मानवीय संकट का अंत हो सके.