शुक्रवार, 24 अप्रैल, 2009 को 02:15 GMT तक के समाचार
सेना और तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में फंसे तमिल नागरिकों की स्थिति से चिंतित भारत सरकार ने अपने दो वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल श्रीलंका भेजने का फ़ैसला किया है.
विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने घोषणा की कि सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन शुक्रवार को कोलंबो जाएंगे.
इसके पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें उत्तरी श्रीलंका की स्थिति की समीक्षा करने के बाद ये फ़ैसला किया गया.
पिछले कुछ दिनों में श्रीलंका पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये दूसरी बैठक आयोजित की थी.
इस बैठक में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्री एके एंटनी, गृह मंत्री पी चिदंबरम और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिवशंकर मेनन मौजूद थे.
भारत चिंतित
बैठक के बाद प्रणब मुखर्जी ने कहा,'' भारत सरकार युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे तमिल नागरिकों को लेकर चिंतित है.''
उनका कहना था,'' भारत सरकार इस मसले पर गंभीर है. श्रीलंका में हो रही मौतों पर हम नाखु़श हैं. निर्दोष नागरिकों की हत्या बंद होनी चाहिए. साथ ही सभी तरह की आक्रामकता बंद होनी चाहिए.''
प्रणब मुखर्जी का कहना था कि सैन्य कार्रवाई इस समस्या का समाधान नहीं है और इसके लिए राजनीतिक प्रयास होने चाहिए.
ख़बरें हैं कि अपनी श्रीलंका यात्रा के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और शिवशंकर मेनन श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाक़ात कर उन्हें भारत की चिंता से अवगत कराएंगे.
भारत सरकार तमिल शरणार्थियों को लेकर भी चिंतित है. श्रीलंका के संघर्ष क्षेत्र से जान बचकर निकले नागरिक भारत पहुँचने की कोशिश कर सकते हैं और भारत सरकार के लिए उन्हें रोकना मुश्किल हो जाएगा.
भारत ने तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम से भी कहा है कि वो नागरिकों को बंधक बनाने की कोशिश बंद करे.