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मंगलवार, 21 अप्रैल, 2009 को 12:38 GMT तक के समाचार

सुहैल हलीम
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

संजय, प्लीज़ कंट्रोल योरसेल्फ़!

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) सिर्फ़ बेहद ख़तरनाक अपराधों की छानबीन करती है, जैसे राजीव गाँधी की हत्या, बोफोर्स तोपों के सोदे में दलाली या फिर जूते जैसे ख़तरनाक हथियारों से गृहमंत्री पर हमला.

या कम से कम जगदीश टाइटलर तो यही चाहते हैं. उन्होंने माँग की है कि गृहमंत्री पी चिदंबरम पर जूता फेंके जाने की जाँच सीबीआई से कराई जाए!

(जगदीश टाइटलर कांग्रेसी नेता हैं जिन पर वर्ष 1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद भड़कने वाले सिख विरोधी दंगों में हाथ होने का आरोप था)

मिस्टर टाइटलर का दावा है कि जूता एक साजिश के तहत फेंका गया जिसका मकसद लोक सभा चुनाव के लिए उनका टिकट कटवाना था.

टाइटलर साहब, सीबीआई पर आपको इतना भरोसा क्यों है यह हम समझ सकते हैं. जाँच सीबीआई से मत कराइए, वो चाहे देर ही से दे, लोगों को अक्सर क्लीन चिट दे देती है. जैसे दंगों के सिलसिले में 25 वर्ष बाद आपको दी है.

नरेंद्र मोदी बहुत अच्छे हैं

मैं आज से नरेंद्र मोदी का फ़ैन बन गया हूँ. इसके दो कारण हैं. एक तो ये कि मेरे ख़्याल में नरेंद्र मोदी ये डायरी पढ़ते हैं और दूसरा ये कि वे बहुत ही प्रैक्टिकल हैं.

यदि आप भी नरेंद्र मोदी की तरह डायरी पढ़ते हैं तो आपको शायद याद होगा कि हमने सियासी नेताओं को मच्छरदानी के जाल के पीछे खड़े होकर जनसभाओं को संबोधित करने की सलाह दी थी. जूतों से अपनी सुरक्षा करने के लिए.

आज के अख़बारों में एक तस्वीर छपी है जिसमें मोदी साहब मच्छरदानी के पीछे तो नहीं, वॉलीबाल के नेट के पीछे खड़े होकर जनसभा को संबोधित कर रहे हैं.

हो सकता है कि सीबीआई ने उन्हें जूतों के ख़तरों से आगाह किया हो, और ये भी हो सकता है कि उन्होंने अतीत में कुछ ऐसे काम किए हों जिनकी वजह से उन्हें ख़ुद ख़तरा महसूस हो रहा हो.

न जाने कि उनके अतीत में ऐसा क्या है? मैं शत-प्रतिशत गारंटी से कह सकता हूँ कि सिख विरोधी दंगों के सिलसिले में उनका नाम कभी नहीं आया.

क्या ही अच्छा हो कि इस बात की जाँच भी सीबीआई ही करे.

औरतों की तौहीन

अगर आप फ़िल्मों के शौकीन हैं तो मुन्ना भाई को तो जानते ही होंगे. वही जादू की झप्पी वाले. लंबे बाल, नशीली आँखें...वो जो चोली के सभी राज जानते हैं, जो विचारधारात्मक विरोध की वजह से अपनी बहन के चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने तक को तैयार नहीं...जो अब समाजवादी पार्टी के महासचिव बन गए हैं.

जी हां गाँधीगिरी को मशहूर करने वाले संजय दत्त.

प्रतापगढ़ मे एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वो प्रतापगढ़ की जनता को जादू की झप्पी (प्यार से गले लगाना) और पप्पी देना चाहते हैं (अब इसका मतलब मैं आपको क्या समझाऊँ). और अगर मौक़ा मिले तो उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के साथ भी ऐसा ही करना चाहते हैं.

ये सिर्फ़ मायावती की ही नहीं, पूरी औरतज़ात की तौहीन है या कम से कम प्रतापगढ़ की जिलाधीश का तो यही ख़्याल है. उनके हुकुम पर संजय दत्त के ख़िलाफ़ अश्लीलता या इससे मिलते-जुलते किसी आरोप में मुक़दमा दर्ज किया गया है.

संजय, प्लीज़ कंट्रोल योरसेल्फ़! चुनाव बच्चे भी देखते हैं. कहीं चुनाव आयोग चुनाव के कवरेज को 'ए' सर्टिफ़िकेट ना दे दे!