शनिवार, 18 अप्रैल, 2009 को 21:38 GMT तक के समाचार
आलोक कुमार
बीबीसी संवाददाता, बेतिया से
लालू यादव के साले और हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए साधु यादव का कहना है कि बिहार की बदहाली के लिए कहीं न कहीं लालू भी ज़िम्मेदार हैं.
पश्चिम चंपारण यानी बेतिया से किस्मत आज़मा रहे साधु यादव का मानना है कि बिहार में नीतीश सरकार से पहले राजद की 15 वर्षों तक सरकार रही और उस दौरान गड़बड़ियाँ भी हुईं.
वो कहते हैं, "' मैंने हमेशा पार्टी के उन मंत्रियों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की थी जो सही से काम नहीं कर रहे थे. आज कई ऐसे नेता चुनाव हार कर बैठे हुए हैं.''
ये पूछने पर कि क्या उन्होंने सिर्फ़ टिकट नहीं मिलने के कारण राजद छोड़ दिया, तो उनका कहना था, '' मेरे पास कोई नौकरी नहीं है, ना ही मैं कोई व्यवसाय करता हूँ. नेतागिरी करता हूँ, तो चुनाव लड़े बिना कैसे रह सकता हूँ.''
लालू यादव का ज़िक्र करते हुए वो कहते हैं, '' ये जान लीजिए की मैंने पार्टी नहीं छोड़ी. मेरे नेता ने मुझे छोड़ दिया.''
चुनाव मैदान में लालू के मुस्लिम-यादव समीकरण और लोक जनशक्ति पार्टी के साथ उसके गठबंधन का सामना वो कैसे पर पाएंगे, इसके बारे में उनका कहना था,'' ये दल अपने स्वार्थ के लिए मुसलमानों का इस्तेमाल करते आए हैं. जबकि कांग्रेस देश बचाने वाली पार्टी है. ये एक सेक्युलर पार्टी है और समंदर की तरह है जिसमें कई धाराएँ आकर मिलती हैं.''
चुनावी मुद्दों पर वो कहते हैं कि विकास और नीतीश सरकार की कथित विफलता मुख्य मुद्दा है.
साधु यादव कहते हैं.'' नीतीश का वादा था कि तीन महीने में बिहार को बदल देंगे. कुछ नहीं हुआ. कानून व्यवस्था ठीक नहीं हुई, सबसे ज़्यादा नुकसान यहाँ की जनता को हुआ.''
वो कहते हैं, '' चंपारण की धरती पर अभी तक विकास की गति अटकी हुई है. गांधी की धरती पर कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. कहीं कोई काम नहीं हुआ है, यही सबसे बड़ा मुद्दा है.''