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गुरुवार, 16 अप्रैल, 2009 को 13:13 GMT तक के समाचार

सुहैल हलीम
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

माँ तो हमारी भी मुसलमान हैं लेकिन...

तो लाल कृष्ण आडवाणी भी उन राजनेताओं की सूची में शामिल हो ही गए जिन पर जूते-चप्पल फेंके गए हैं. लेकिन जिस तेज़ी से ये बीमारी फैल रही है, उससे ऐसा लगता है कि वो नेता जिनकी जान को कोई ख़तरा नहीं, वे बुलेट प्रूफ़ शीशे के पीछे खड़े होने के बजाए अगर मच्छरदानी के जाल के पीछे खड़े हों तो सुरक्षित रह सकते हैं.

आक्रोष प्रदर्शन का ये तरीक़ा निसंदेह मुनासिब नहीं लेकिन शायद वो दिन दूर नहीं जब कोई कंपनी आप की ओर से ये काम करने के लिए बाज़ार में आ जाएगी.

आख़िर इतनी गर्मी और आउटसोर्सिंग के इस दौर में आदमी सिर्फ़ एक चप्पल फेंकने के लिए कहां कहां धक्के खाए.

माँ तो हमारी भी मुसलमान हैं

ये तो आपने सुन ही लिया होगा कि संजय दत्त टाडा के तहत जेल में थे. उनके अनुसार उनके साथ हिंसक रवैया अपनाया गया था.

और अब लोक सभा चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की एक सभा को संबोधित करते हुए संजय दत्त ने ये भी कहा कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उनकी माँ मुसलमान थीं (संजय दत्त सुनील दत्त और नर्गिस के बेटे हैं.

संजय, माँ तो हमारी भी मुसलमान हैं. ये भी तो हो सकता है कि बात कुछ और रही हो. मिसाल के तौर पर ख़तरनाक स्वचलित राइफ़ल या शायद हथगोला? कुछ याद आया? और हां एक बात और.

आपने तो सुना ही होगा, पुलिस और बदमाश की न दोस्ती अच्छी और न दुश्मनी.

ये आपसे बेहतर और कौन जान सकता है. तो फिर आप इससे कुछ सबक़ क्यों नहीं लते?

अब कौन रक्षा करेगा?

वरूण गांधी की जेल से पेरोल पर रिहाई की ये शर्त है कि वो भड़काउ बयान नहीं देंगे. पहले वरूण का दावा था कि उन्होंने हाथ और गले काटने की बात की ही नहीं थी, सीडी नक़ली थी.

जेल में कुछ दिन शांति में सोचने का मौक़ा मिला तो उन्हें याद आया कि ये सब बातें उन्होंने कही तो थीं, लेकिन साधारण मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि तालेबान और अलक़ायदा के लिए.

मुझे तो चिंता ये है कि सुप्रीम कोर्ट से वादे के बाद वरूण गांधी ने भी चुप्पी साध ली तो तालेबान और अलक़ायदा से हमारी हिफ़ाज़त कौन करेगा?

सब मीडिया की ग़लती है

और हां, वरुण का ज़िक्र निकल ही आया है तो एक बात और. मैं पीलीभीत गया जहां वरुण ने ये भाषण दिया था तो भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद के दो नेताओं ने मुझसे कहा कि जो कुछ हुआ उसके लिए आप ज़िम्मेदार हैं.

मैंने पूछा कि मैं तो पहली बार पीलीभीत आया हूँ, मुझसे क्या हो गया?
उन्होंने स्पष्ट किया, “मीडिया की ग़लती है.”

रात लाल कृष्ण आडवाणी का इंटरव्यू देख रहा था जो उन्होंने हवाई जहाज़ में सफ़र करते हुए एक टीवी चैनल को दिया था.

आडवाणी साहब का भी यही कहना था कि जो कुछ किया, मीडिया ने किया.

मैं मालूम करने की कोशिश कर रहा हूं कि क्या ये भाषण मीडिया ने ही दिए थे और क्या एहतियात बरतने की ज़मानत भी मीडिया ने ही दी है?

आडवाणी साहब, अगर वास्तव में ऐसा है तो मीडिया की ओर से नैतिक ज़िम्मदारी क़बूल करता हूँ.