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शनिवार, 04 अप्रैल, 2009 को 09:50 GMT तक के समाचार

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

राहुल गांधी ने अमेठी से भरा पर्चा

कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी ने शनिवार को सुल्तानपुर ज़िला मुख्यालय पर अमेठी लोकसभा क्षेत्र के लिए अपना नामांकन पत्र दाख़िल किया.

इस अवसर पर उनके साथ उनकी माँ और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं.

सोनिया गांधी सोमवार को रायबरेली लोकसभा सीट से अपना पर्चा दाख़िल करेंगी.

राहुल ने अपना नामांकन चार सेटों में दाख़िल किया. विधायक रामसेवक, अमिता सिंह, शिवबालक और नईमा आदि उनके प्रस्तावक थे.

नामांकन पत्र दाख़िल करने के लिए राहुल गांधी शुक्रवार शाम ही अमेठी के मुँशीगंज गेस्ट हाउस पहुँच गए थे और सोनिया गांधी शनिवार सुबह वहाँ पहुँचीं.

सुबह 11 बजे वहाँ से माँ-बेटे सुल्तानपुर ज़िला मुख्यालय के लिए रवाना हुए. इस 30 किमी लंबे रास्ते में लोगों ने जगह-जगह उनका ज़ोरदार स्वागत किया और उनपर फूल बरसाए.

दोपहर क़रीब साढ़े बारह बजे वे ज़िला कलेक्ट्रेट पहुँचे और अंदर जाकर नामांकन पत्र दाख़िल किया. इस दौरान कलेक्ट्रेट के चारों और उनके समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा.

राहुल गांधी के नामांकन का कवरेज करने के लिए बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी भी जमा हुए थे लेकिन अव्यवस्था और भीड़ के चलते कोई भी सोनिया या राहुल गांधी से बात नहीं कर पाया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि अमेठी से तो राहुल गांधी की जीत पक्की है लेकिन बग़ल की सुल्तानपुर सीट के बारे में ऐसा दावा नहीं किया जा सकता है.

सुल्तानपुर से कांग्रेस ने संजय सिंह को उम्मीदवार बनाया है.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति 1989 से लगातार कमज़ोर हुई है. उसका जैसा प्रभाव अमेठी और रायबरेली सीट पर है, वैसा दोनों के बग़ल वाली सीटों पर नहीं है.

दो-दो सीटें

इस साल कई दौर की बातचीत के बाद भी कांग्रेस का समाजवादी पार्टी से कोई समझौता नहीं हो पाया. अब कांग्रेस ने प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से अधिकांश पर चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है.

चुनावी समझौता न होने के बाद सपा ने कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली की सीटें छोड़ी हैं जबकि कांग्रसे ने सपा के लिए मैनपुरी और कन्नौज की सीटें छोड़ी हैं.

मैनपुरी से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव तो कन्नौज से उनके पुत्र अखिलेश सिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं.

समझौता न होने के बाद भी कांग्रेस और सपा दोनों एक-दूसरे के प्रति आक्रामक नहीं हैं. दोनों का मक़सद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराना है.

राहुल गांधी ने लोकसभा का पहला चुनाव 2004 में अमेठी से ही जीता था.