शनिवार, 28 मार्च, 2009 को 06:00 GMT तक के समाचार
अमरीकी सेना का कहना है कि उसके पास इस बात के सबूत हैं कि पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई अब भी तालेबान की मदद कर रही है.
अधिकारियों का कहना है कि ये मदद बंद होनी चाहिए.
अमरीकी संयुक्त कमान के प्रमुख एडमिरल माइक मुलेन ने कहा कि पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई सीमावर्ती देशों अफ़ग़ानिस्तान और भारत के चरमपंथियों से संपर्क बनाए हुए है.
दूसरी ओर अमरीकी केंद्रीय कमान के डेविड पेट्रास ने कहा कि पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी ने कुछ चरमपंथियों गुटों को खड़ा भी किया है और उनसे उसका संपर्क बना हुआ है.
इधर न्यूयार्क टाइम्स ने अमरीकी अधिकारियों के हवाले से छापा है कि दक्षिण अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के अभियान ने जो ज़ोर पकड़ा है, वह पाकिस्तान की सेना के धन और सैन्य आपूर्ति से ही संभव हुआ है.
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति ओबामा ने अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमरीकी रणनीति में व्यापक बदलाव की घोषणा करते हुए कहा था कि अल क़ायदा और उससे जुड़े संगठन अब भी अमरीका और विश्व के लिए एक बड़ा ख़तरा बने हुए हैं.
ओबामा ने अफ़ग़ानिस्तान में 4000 अतिरिक्त अमरीकी सैनिक तैनात करने की घोषणा की थी.
साथ ही पाकिस्तान को अगले पाँच वर्षों तक 7.5 अरब डॉलर की सीधी सहायता देने का ऐलान किया था.
अमरीकी नीति
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमरीकी नीति में बदलाव की बराक ओबामा की घोषणा का दोनों देशों के नेताओं ने स्वागत किया है.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि इस नई नीति से उनके देश में लोकतंत्र मज़बूत होगा.
उन्होंने कहा कि क़बायली इलाक़ों में विशेष पुनर्निर्माण क्षेत्र स्थापित करने के लिए अमरीकी सहायता से उन लोगों के बीच अच्छा माहौल बनेगा जो लंबे समय से 'आतंकवाद और चरमपंथ' से परेशान हैं.
दूसरी ओर अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि इस नीति से उनके देश में चरमपंथियों के बढ़ते ख़तरे से सफलतापूर्वक निपटा जा सकेगा.
राष्ट्रपति करज़ई का कहना था कि उनके देश की सेना को प्रशिक्षण देने के लिए चार हज़ार सैनिकों की तैनाती से दोनों देशों को फ़ायदा होगा.
उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा के उस बयान का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अल क़ायदा का ख़तरा मूल रुप से पाकिस्तान से आता है.