गुरुवार, 26 मार्च, 2009 को 00:36 GMT तक के समाचार
अमरीका ने पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय तालेबान और अल क़ायदा के तीन नेताओं की सूचना देने पर भारी इनाम की घोषणा की है.
अमरीकी विदेश विभाग ने तहरीके तालेबान के नेता बैतुल्ला महसूद, सिराजुद्दीन हक्क़ानी पर 50-50 लाख डॉलर और अबू याहया पर 10 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया है.
बैतुल्ला महसूद पाकिस्तान के दक्षिणी वज़ीरिस्तान इलाक़े में तालेबान के प्रमुख नेता माने जाते हैं.
जनवरी, 2007 में मैरियट होटल में हुए आत्मघाती हमले में उनके समर्थकों का हाथ होने का संदेह व्यक्त किया गया था.
उनका नाम पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या से भी जोड़ा गया था. हालांकि उनका कहना था कि बेनज़ीर पर हुए हमले से उनका कोई लेना-देना नहीं था.
सुरक्षित पनाहगाह
ख़बरों के अनुसार बैतुल्ला के पास लगभग 20 हज़ार तालेबान समर्थक लड़ाके हैं. इनमें से अधिकतर महसूद कबीले से हैं.
यह इलाक़ा अल क़ायदा और तालेबान के लिए सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है.
बैतुल्ला महसूद के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने इस इलाक़े में बड़ी संख्या में उन लड़ाकों को पनाह दी जो अफ़ग़ानिस्तान में हमले करते हैं.
इसमें आत्मघाती धमाके और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सेना के ख़िलाफ़ सीमा पार से हमले करना शामिल है.
पाकिस्तानी सेना ने दक्षिण वज़ीरिस्तान के इस इलाक़े को चरमपंथियों से मुक्त कराने के लिए कई अभियान चलाए लेकिन कामयाबी नहीं मिली.
चरमपंथियों के साथ पाकिस्तान सरकार ने दो समझौते भी किए जिसमें से एक पर बैतुल्ला महसूद ने दस्तख़त किए थे.
हक्क़ानी पर इनाम
उनके अलावा अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान के चर्चित तालेबान कमांडर सिराजुद्दीन हक्क़ानी पर 50 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया है.
माना जाता है कि उनका अल क़ायदा से नजदीकी संबंध रहा है.
ऐसा माना जाता है कि हक्क़ानी ने ही वर्ष 2002 में तोरा-बोरा इलाक़े में अमरीकी बमबारी से ओसामा बिन लादेन के बचाने में मदद की थी.
इनके अलावा अबू याहया पर 10 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया गया है.
वो लीबियाई नागरिक हैं और 2002 में उन्हें पकड़ लिया गया था और अफ़ग़ानिस्तान के बगराम स्थित अमरीकी सैनिक अड्डे पर रखा गया था.
लेकिन जुलाई, 2005 में वो निकल भागने में कामयाब रहे और उसके बाद से वो कई बार अल क़ायदा के वीडियो में नज़र आए हैं.