शुक्रवार, 20 मार्च, 2009 को 17:14 GMT तक के समाचार
बहुजन समाज पार्टी की नेता और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने राज्य की सभी अस्सी लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है.
उन्होंने शनिवार को केरल से देशव्यापी चुनाव प्रचार शुरु करने की घोषणा की है.
एक अन्य राजनीतिक घटनाक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता पीए संगमा ने दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लालकृष्ण आडवाणी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेता प्रकाश कारत से मुलाक़ात की है.
संगमा का कहना है कि मेघालय में राष्ट्रपति शासन लगाने के फ़ैसला अनुचित है और केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के लोगों के साथ धोखा किया है.
उन्होंने कहा है कि मंगलवार को वो अपनी अगली रणनीति की घोषणा करेंगे. संगमा ने कहा कि पार्टी के नेता शरद पवार महाराष्ट्र के बारे में ज़्यादा बेहतर समझ सकते हैं लेकिन पूर्वोत्तर की स्थिति को वो ज़्यादा बेहतर जानते हैं.
प्रकाश कारत ने पार्टी के मुखपत्र 'पीपुल्स डेमोक्रेसी' में छपे अपने लेख में कहा है कि तीसरे मोर्चे के गठन से कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दोनों की परेशानियाँ बढ़ गई हैं.
उन्होंने कहा है कि दोनों ही गठबंधन टिकाऊ नहीं है और अब वैकल्पिक गठबंधन को मौका मिलेगा.
उत्तर प्रदेश में बिछी बिसात
उत्तर प्रदेश की सभी अस्सी लोकसभा सीटों के लिए बसपा प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही राज्य में चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है.
राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं.
वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन टूट चुका है.
सपा ने अमेठी और रायबरेली को छोड़ कर बाकी सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने का मन बनाया है.
मायावती ने शुक्रवार को कहा कि लोकसभा चुनावों के बाद सत्ता की चाबी वो अपने हाथ में रखना चाहती हैं.
उन्होंने कहा कि बसपा ने वैसे तो पूरे देश में उम्मीदवार खड़ा करने का निश्चय किया है लेकिन उत्तर प्रदेश में ध्यान सबसे ज़्यादा रहेगा.
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी अन्य दलों की तरह कोई घोषणा पत्र जारी नहीं करती, उसके स्थान पर मतदाताओं से अपील करती है.
इस अवसर पर उन्होंने अपील से संबंधित 32 पन्नों की पुस्तिका जारी की.
अपील में उन्होंने 22 महीने की अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा है कि केंद्र में बसपा की सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश की तरह पूरे देश में गरीबों, मज़दूरों, किसानों, कर्मचारियों, व्यापारियों और अन्य वर्गों के लोगों की समस्याओं का निदान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा.