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बुधवार, 18 मार्च, 2009 को 14:15 GMT तक के समाचार

वरुण की रैलियों की रिकार्डिंग का आदेश

चुनाव आयोग ने वरुण गांधी के कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में आदेश दिया है कि उनकी भविष्य की रैलियों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए.

साथ ही, आयोग ने वरुण के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई नहीं करने के आरोप में पीलीभीत के अतिरिक्त ज़िलाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक का तबादला कर दिया है.

आयोग ने कहा कि 'वरुण ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है.'

ग़ौरतलब है कि वरुण गांधी पर आरोप है कि पीलीभीत में चुनाव प्रचार के दौरान छह मार्च को उन्होंने कथित रुप से भड़काऊ भाषा में मुसलमानों के ख़िलाफ़ टिप्पणियाँ की थीं.

चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद वरूण गांधी के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है, जो कि दो समुदायों के बीच वैमनस्य भड़काने के मामले में चलाया जाता है.

आयोग ने वरुण को नोटिस जारी कर आरोपों पर स्पष्टीकरण भी माँगा है.

भाजपा की सफ़ाई

उधर भारतीय जनता पार्टी ने वरुण गांधी के कथित भड़काऊ भाषण से ख़ुद अलग करते हुए कहा कि वह उनके बयान से सहमत नहीं है.

बुधवार को दिल्ली में भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवददाताओं से कहा, "मीडिया में वरुण के जो कथित बयान दिखाए गए हैं, भाजपा उसको उचित नहीं मानती और उससे अपने को अलग करती है۔"

रविशंकर प्रसाद का कहना था कि ख़ुद वरुण ने सीडी के साथ छेडछाड़ की बात कही है और चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस दिया है और वो उसके जवाबदेह हैं.

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सिलसिले में भाजपा को कोई नोटिस नहीं आया है.

वरुण का सफ़ाई

उधर बुधवार को वरुण गाँधी ने कथित भड़काऊ भाषण को अपना मानने से इनकार करते हुए कहा है कि उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया है.

उन्होंने दिल्ली में मीडिया के सामने आकर कहा कि जो सीडी दिखाई जा रही है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और उसमें जो भाषण दिखाया गया है उसमें न तो शब्द उनके हैं और न आवाज़ उनकी है.

उनका कहना था, "न तो मैंने ऐसा भाषण दिया है और न मैं किसी संप्रदाय विशेष के ख़िलाफ़ हूँ".

कई बचाव में आए

इस विवाद के आने के बाद जहाँ भाजपा ने अधिकारिक स्तर पर वरुण के बयान से ख़ुद को अलग कर लिया है, वहीं पार्टी के उपाध्यक्ष वैंकया नायडू ने वरुण का बचाव किया है.

उनका कहना था, "वरुण ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है जो सांप्रदायिक हो, जो सीडी मीडिया में दिखाई जा रही है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और वो मनगढ़ंत है. पार्टी पहले ये जानेगी कि असल में वरुण ने कहा क्या है."

नायडू ने इस मामले में कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, "कांग्रेस वरुण के घर वालों से बैर रखती है और इस हक़ीक़त से हर कोई वाक़िफ़ है."

हालांकि भाजपा के कई नेताओं का ये भी कहना रहा है कि ख़ुद वरुण को संवाददाता सम्मेलन करके ये बताना चाहिए उन्होंने क्या कहा है और क्या नहीं कहा है.

लेकिन दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टी शिवसेना भी वरुण के बचाव में आगे आ गई है. पार्टी के प्रमुख बालठाकरे ने अपने मुखपत्र सामना में कहा है, "उन्होंने जो कुछ कहा है उसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. वो एक गांधी है जो हमें पसंद है."

आलोचना

वरुण के कथित भड़काऊ बयान की कई राजनीतिक दलों ने आलोचना की है.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "वो एक ऐसी पार्टी से जुड़े हैं जिसकी अल्पसंख्यक विरोधी विचारधारा है."

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने कहा है कि यह राज्य में क़ानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने का सुनियोजित षड्यंत्र है.