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सोमवार, 16 मार्च, 2009 को 12:20 GMT तक के समाचार

शोएब हसन
बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद

पाकिस्तान में जश्न का माहौल

पाकिस्तान में बर्ख़ास्त जजों की बहाली के फ़ैसले का देशभर में स्वागत हो रहा है. देश भर में जश्न भी मनाया जा रहा है. पूर्व मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मुहम्मद चौधरी के घर के बाहर लोगों का ताँता लगा हुआ है.

चौधरी ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की पुनर्बहाली के लिए देशवासियों को बधाई दी है.

पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने वर्ष 2007 में आपातकाल लगाते हुए कई जजों को बर्ख़ास्त कर दिया था.

जजों की बहाली को लेकर सोमवार को राजधानी इस्लामाबाद में बड़ी रैली होने वाली थी और संसद के बाहर धरना देने की योजना थी.

देश के कई हिस्सों से लोग इस रैली में हिस्सा लेने के लिए इस्लामाबाद पहुँच रहे थे और सरकार उन्हें रोकने की कोशिश कर रही थी.

घोषणा

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ भी अपने हज़ारों समर्थकों के साथ रविवार को इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए थे.

लेकिन पाकिस्तान सरकार के इस फ़ैसले के बाद अब उन्होंने विरोध मार्च ख़त्म करने की घोषणा की है.

जजों की बहाली के फ़ैसले को राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी की हार माना जा रहा है, जिन्होंने कहा था कि वे जजों को बहाल नहीं करेंगे.

रविवार रात को पूर्व मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के घर के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे थे. लेकिन सोमवार सुबह प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी की घोषणा के बाद वहाँ मौजूद लोगों में उत्साह की लहर दौड़ गई.

जीत-हार

राष्ट्र के नाम अपने संदेश में गीलानी ने कहा कि सभी बर्ख़ास्त जज तत्काल प्रभाव से बहाल किए जाएँगे. सरकार के इस फ़ैसले को जनता के साथ-साथ नवाज़ शरीफ़ की जीत भी माना जा रहा है.

विरोध मार्च शुरू होने से पहले राष्ट्रपति ज़रदारी ने कहा था कि वे जजों को बहाल नहीं करेंगे. साथ ही सरकार ने चेतावनी दी थी कि विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

लेकिन दोनों ही मुद्दों पर सरकार को झुकना पड़ा है. पाकिस्तान सरकार के इस फ़ैसले से न सिर्फ़ नवाज़ शरीफ़ की लोकप्रियता बढ़ेगी बल्कि अब राष्ट्रपति ज़रदारी और उनकी पार्टी की सरकार को स्वतंत्र न्यायपालिका का गठन करना पड़ेगा.

इसका मतलब ये भी हुआ कि उन क़ानूनों की समीक्षा हो सकती है जिसके तहत कई नेताओं को इसकी छूट मिली है कि उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का मुक़दमा नहीं चलेगा.

ये भी हो सकता है कि राष्ट्रपति ज़रदारी अयोग्य घोषित कर दिए जाए और उन्हें अपना पद छोड़ना पड़े.