सोमवार, 16 मार्च, 2009 को 01:39 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी ने सोमवार तड़के सुबह देश को संबोधन में बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी को बहाल करने की घोषणा की.
साथ ही उन्होंने बर्ख़ास्त सभी जजों को भी बहाल करने का ऐलान किया.
इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने सोमवार को इस्लामाबाद में प्रस्तावित लॉंग मार्च समाप्त करने की घोषणा कर दी.
प्रधानमंत्री गीलानी ने कहा कि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोंगर 21 मार्च को रिटायर हो रहे हैं और उनका स्थान बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी संभालेंगे.
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने वादा किया था कि किसी भी जज को उसके पद से नहीं हटाया जाएगा, इस कारण इफ़्तिख़ार चौधरी को अब्दुल हमीद डोंगर के रहते बहाल करने में मुश्किल आ रही थी.
गीलानी का कहना था कि अब जबकि मुख्य न्यायाधीश अब्दुल हमीद डोंगर अवकाश ग्रहण कर रहे हैं तो अब वादा पूरा करने का समय आ गया है.
उनका कहना था कि इस संबंध में अधिसूचना जारी की जा रही है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के टीवी पर अपने संबोधन के बाद इस्लामाबाद स्थित इफ़्तिख़ार चौधरी के घर पर उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई.
उल्लेखनीय है कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने शासनकाल के दौरान मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौघरी समेत 60 अन्य जजों को बर्ख़ास्त कर दिया था जिसमें से कुछ ही जजों को बहाल किया गया था.
उन्होंने लॉंग मार्च के दौरान गिरफ़्तार लोगों को रिहा करने की भी घोषणा की.
नवाज़ का मार्च
पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ की ये मुख्य माँग रही है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि घोषणा की कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई शहबाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले की समीक्षा के लिए अपील करेगी जिसमें उनके किसी भी निर्वाचित पद पर काम करने से रोक लगा दी गई थी.
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने 25 फरवरी को अपने फ़ैसले में पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ के किसी भी निर्वाचित पद पर काम करने से रोक लगा दी थी.
गीलानी ने नवाज़ शरीफ़ से आंदोलन समाप्त करने और 'चार्टर ऑफ़ डेमोक्रेसी' पर मिलकर काम करने की अपील की थी.
उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ ने वर्ष 2006 में इस चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे.
दोनों नेताओं ने ये वादा किया था कि देश में लोकतंत्र बहाल किया जाएगा, टकराव से बचने की कोशिश होगी और राजनीति में सेना की भूमिका को ख़त्म किया जाएगा.