रविवार, 15 मार्च, 2009 को 23:06 GMT तक के समाचार
ऐसी ख़बरें हैं कि पाकिस्तान सरकार थोड़ी ही देर में बर्ख़ास्त मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी को बहाल करने की घोषणा करने जा रही है.
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी किसी भी समय देश के नाम संबोधन कर सकते हैं और उसमें जजों की बहाली की घोषणा कर सकते हैं.
अपने हज़ारों समर्थकों के साथ इस्लामाबाद कूच कर चुके पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ की यह मुख्य माँग रही है.
ब्रिटेन में पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने माना है कि सरकार में बर्ख़ास्त जजों की बहाली के लेकर गतिविधियाँ चल रही है, हालाँकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि सरकार झुक गई है.
इससे पहले नवाज़ शरीफ़ ने इस्लामाबाद की ओर लॉंग मार्च को देश में क्रांति की शुरुआत बताया है.
नवाज़ शरीफ़ समेत इस्लामाबाद की ओर कूच कर रहे वकीलों की योजना सोमवार को वहाँ संसद के सामने धरना-प्रदर्शन करने की है.
लॉंग मार्च
रविवार सुबह से ही पाकिस्तान की राजनीति में उस समय और गरमी बढ़ गई, जब ये ख़बर आई कि नवाज़ शरीफ़ को नज़रबंद कर दिया गया है.
हालाँकि पाकिस्तान की सरकार ने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है.
बाद में नवाज़ शरीफ़ मीडिया के सामने आए और पत्रकारों को बताया कि सरकार ने उन्हें ग़ैर क़ानूनी रूप से इस्लामाबाद जाने से रोकने की कोशिश की है.
एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, "इस्लामाबाद हमारी नियति है. हम इस्लामाबाद के लिए निकल पड़े हैं. आश्चर्यजनक रूप से लोगों का समर्थन मिल रहा है. पाकिस्तान के इतिहास का यह स्वर्ण काल है. ये क्रांति की शुरुआत है."
नवाज़ शरीफ़ की कथित नज़रबंदी की ख़बर फैलते ही पार्टी समर्थक सड़कों पर आ गए और कई जगह पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई.
शरीफ़ के सोमवार तड़के इस्लामाबाद के नज़दीक रावलपिंडी पहुँचने की संभावना है जहाँ उनके भाई और पंजाब प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ उनके साथ हो जाएंगे.