शनिवार, 14 मार्च, 2009 को 22:14 GMT तक के समाचार
श्रीलंका के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि दवाइयों की कमी के कारण तमिलों के इलाक़े का आख़िरी अस्पताल भी बंद होने की कगार पर है.
डा टी वरतराजा का कहना है कि अगर यह अस्पताल बंद हो गया तो युद्ध क्षेत्र में हज़ारों बीमार लोगों की जान को ख़तरा पैदा हो जाएगा.
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब युद्ध क्षेत्र में फँसे नागरिकों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता की जा रही है.
इस इलाक़े में सेना तमिल विद्रोहियों के गढ़ को ख़त्म करने के लिए लड़ाई लड़ रही है.
माना जाता है कि 70 हज़ार से दो लाख के बीच लोग इस क्षेत्र में फँसे हुए हैं.
डॉ वरतराजा का कहना है कि आवश्यक दवाइयों की भी इतनी कमी है कि अस्पताल को अपनी ज़्यादातर गतिविधियाँ रोक देनी पड़ी हैं.
हालांकि श्रीलंका सरकार का कहना है कि जो दवाइयाँ मांगीं गईं थीं वो पास के शहर से भिजवा दी गई हैं और जैसे ही सैन्य अधिकारी अनुमति देते हैं, दवाइयाँ वहाँ पहुँचा दी जाएँगीं.
रेडक्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति काफ़ी समय से मानव त्रासदी की चेतावनी देती रही है और कहती रही है कि युद्ध के इलाक़े से नागरिकों को एक साथ निकाले जाने की आवश्यकता है.
हालांकि सरकार हमेशा इस तरह की किसी भी त्रासदी की आशंका से इनकार करती है और कहती है कि तमिल विद्रोहियों के इलाक़े में भी नागरिकों के लिए भोजन और दवाइयाँ नियमित रुप से भेजी जा रही हैं.