सोमवार, 09 मार्च, 2009 को 23:53 GMT तक के समाचार
श्रीलंका सरकार ने अपने मंत्रिमंडल में एक ऐसे व्यक्ति को शामिल किया है जो कभी श्रीलंका सरकार के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे विद्रोहियों के प्रमुख नेताओं में से एक था.
कभी तमिल विद्रोहियों के उपनेता रहे कर्नल करुणा को श्रीलंका सरकार ने मंत्री बना दिया है. कर्नल करुणा का मूल नाम विन्यागमूर्ति मुरलीधरन है.
हालांकि करुणा के अब एलटीटीई से संबंध ख़त्म हुए भी लगभग छह साल पूरे होने को आ रहे हैं.
कर्नल करुणा वर्ष 2004 में तमिल विद्रोहियों से अलग हो गए थे.
फिलहाल सरकार ने कर्नल करुणा को कैबिनेट से बाहर ही रखा है और उन्हें राष्ट्रीय एकता और मैत्री, संधि से संबंधित मंत्रालय सौंपा गया है.
कर्नल करुणा के एलटीटीई से अलग होने का तमिल विद्रोही अभियान को बहुत नुकसान पहुँचा था. तमिल विद्रोहियों की देश के पूरब में वर्ष 2007 की हार के लिए भी इसे एक मूल कारण माना जाता है.
मुरलीधरन यानी करुणा को राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने शपथ दिलाई.
कर्नल करुणा से मुरलीधरन
मुरलीधरन और उनके साथ पूर्वी श्रीलंका के क़रीब 2000 तमिलों ने वर्तमान सत्ताधारी पार्टी के साथ हाथ मिला लिया है.
मुरलीधरन ने पिछले वर्ष नवंबर में ही घोषणा कर दी थी कि उनसे साथ विद्रोहियों को छोड़कर आए लोग अगले कुछ महीनों में हथियार छोड़ देंगे और सुरक्षाबलों के साथ शामिल कर लिए जाएंगे.
हालांकि कर्नल करुणा के ख़िलाफ़ अभी भी संयुक्त राष्ट्र और ब्रिटेन की ओर से लगाए गए अभियोगों में कुछ मामले लंबित पड़े हैं.
ब्रिटेन की सरकार मुरलीधरन पर प्रवर्तन नियमों की अवहेलना करने का मामला चला रही है.
वहीं संयुक्त राष्ट्र की ओर से मुरलीधरन और उनकी पार्टी पर बच्चों, किशोरों को भर्ती करने जैसे आरोप लगाए गए हैं. इन आरोपों में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले भी शामिल रहे हैं.