शनिवार, 07 मार्च, 2009 को 22:45 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारत को 'इतिहास के बोझ' से मुक्त होने की सलाह देते हुए कहा है कि एक दूसरे को दोष देने की बजाय आगे बढ़ना चाहिए.
उन्होंने कहा कि दशकों के अविश्वास और विवाद के लिए दोनों देश दोषी हैं लेकिन अब दोनों को आगे बढ़ना चाहिए.
पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा, "अतीत कलंकित रहा है, अतीत बहुत बुरा रहा है लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को दोष मत दीजिए."
'इंडिया टुडे कॉनक्लेव' में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आए परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारत में चरमपंथी हमलों के लिए पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी और सेना को ज़िम्मेदार ठहराए जाने की ज़िक्र करते हुए कहा, "अब रवैया बदलने की ज़रुरत है, भारत में अधिक और पाकिस्तान में कम."
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "हमें सच्चाई स्वीकार करनी होगी, आपकी ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ ठीक वही करती है जो आईएसआई करती है. मेरा अनुरोध है कि चलिए इस विवाद को निपटाने के लिए रॉ और आईएसआई पर लगाम लगाते हैं."
सेना और आईएसआई का बचाव
सेना प्रमुख रह चुके और पिछले साल अगस्त में राष्ट्रपति पद छोड़ चुके परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा पाकिस्तान में तालेबान और चरमपंथियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सेना और आईएसआई ही सबसे कारगर हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार उन्होंने कहा, "आईएसआई और पाकिस्तानी सेना के प्रति दुनिया में ग़लतफ़हमी पैदा मत कीजिए."
श्रोताओं के रुप में मौजूद बुद्धिजीवियों के तीखे सवालों के जवाब देते हुए परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में 'आतंकवाद और चरमपंथ' से निपटने में और इस अंचल में अमन क़ायम करने में पाकिस्तान की भूमिका अहम है.
ऐसा नहीं हो सकता था कि परवेज़ मुशर्रफ़ बोल रहे हों और कश्मीर का ज़िक्र न हो. वह भी हुआ. और परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि कश्मीर की समस्या पाकिस्तान ने 1989 में खड़ी नहीं की वह 1947 में ही पैदा हो चुकी थी.
उनका कहना था कि चरमपंथ को ख़त्म करने कश्मीर का शांतिपूर्ण हल ही रास्ता है.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने दाउद इब्राहिम की पाकिस्तान में मौजूदगी और चरमपंथियों के लिए चलाए जा रहे प्रशिक्षण शिविरों के सवालों को तो टाल दिया.
लेकिन उन्होंने भारतीय नेताओं की तारीफ़ करते हुए कहा कि वे हमेशा समस्याओं के समाधानों के साथ उनके पास आते रहे हैं.