बुधवार, 04 मार्च, 2009 को 04:32 GMT तक के समाचार
आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारतीय अख़बारों ने पाकिस्तान में श्रीलंका की टीम पर हमले पर गंभीर चिंता जताई है. अख़बारों ने इस क्रिकेट पर हमला क़रार दिया है और दक्षिण एशिया में क्रिकेट के भविष्य पर सवाल उठाए हैं.
अमर उजाला का शीर्षक है- लहूलुहान क्रिकेट.
अख़बार लिखता है- इसे कहते हैं इंतहा. आतंकवादियों ने अब तक मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों या होटलों पर हमला बोला था. संत, फकीर और निर्दोष रेल या बस यात्री मारे. पर दहशत को मुकाम नहीं मिला. इस बार उन्होंने क्रिकेट पर हमला बोला है जो बिला शक इस महाद्धीप का साझा धर्म है.
दैनिक जागरण का शीर्षक है- खेल पर हमला.
अख़बार लिखता है कि दुनिया स्तब्ध है और क्रिकेट सदमे में. लाहौर के लिबर्टी चौक पर हुए धमाकों और गोलीबारी का शोर थमने के बाद जो तस्वीर सामने है, वह बहुत चिंताजनक है. लड़खड़ाते हमले से जूझता पाकिस्तान मुंबई की तरह हुए इस हमले में भारत का नाम घसीटने पर तुला है.
नवभारत टाइम्स की सुर्खी है- क्रिकेट पर टेरर अटैक.
अख़बार लिखता है कि व्यस्त लिबर्टी चौक पर एक ऐसा अटैक हुआ जिसकी आज तक आशंका ही जताई जा रही थी. क्रिकेट के इतिहास में शायद पहली बार खिलाड़ियों पर चरमपंथी हमला हुआ है.
हिंदुस्तान ने इस्लामाबाद स्थित सुरक्षा विशेषज्ञ आयशा सिद्दीकी की विशेष टिप्पणी छापी है जिसमें उन्होंने कहा है कि अधिकांश पाकिस्तानी इस घटना को पाकिस्तान का मुंबई के तौर पर देख रहे हैं और शक की उंगली भारतीय खुफ़िया एजेंसी रॉ की ओर उठा रहे हैं.
अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स का शीर्षक है- घायल पाकिस्तान ने विदेशी हाथ का आरोप लगाया.
अख़बार लिखता है कि 26/11 की तर्ज पर एक दर्जन हथियारबंद चरमपंथियों ने लाहौर के गद्दाफ़ी स्टेडियम में श्रीलंकाई टीम पर हमला किया और सात खिलाड़ियों को घायल कर दिया और सात पाकिस्तानियों को मार दिया.
इंडियन एक्सप्रेस की हेडिंग है- आतंक की श्रीलंकाई टीम पर चोट, हमले में पाकिस्तान और क्रिकेट घायल.
अख़बार लिखता है कि इस हमले का पहला शिकार शायद इंडियन प्रीमियर लीग बन जाए.
टाइम्स आफ़ इंडिया ने भी आईपीएल पर सवाल उठाए हैं. अख़बार लिखता है कि शायद इस साल आईपीएल न हो पाए.