मंगलवार, 03 मार्च, 2009 को 09:20 GMT तक के समाचार
भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लाहौर शहर में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा है कि 'शीत युद्ध के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद की समस्या अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है.'
लाहौर में हुए हमले पर भारत के अनेक नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है और चिंता जताई है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है और गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि 'खिलाड़ियों को प्रदान की गई सुरक्षा अपर्याप्त थी.'
भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "यह चौंकाने वाली घटना है. स्पष्ट है कि जो सुरक्षा श्रीलंकाई टीम को प्रदान की गई वह अपर्याप्त थी. हम इस हमले की निंदा करते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि श्रीलंकाई खिलाड़ी सुरक्षित होंगे."
भारत के विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने कहा, "हमनें सोच-समझकर भारत की क्रिकेट टीम को पाकिस्तान न भेजने का फ़ैसला किया था. ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान में सुनियोजित तरीके से आतंकवादी गुट प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं और भारत अपनी क्रिकेट टीम को किसी ख़तरे में नहीं डालना चाहता था."
ग़ौरतलब है कि भारत में सरकार और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की इस घटना पर प्रतिक्रिया लगभग एक जैसी है. भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है, "हम इसकी निंदा करते हैं लेकिन पाकिस्तान में स्थिति की असलियत इससे सामने आई है. वह आतंकवाद का केंद्र बना है. पाकिस्तान को स्पष्ट तरीके से आतंकवाद के मूलभूत ढांचे को ध्वस्त करना होगा..."
'मूलभूत ढांचा ध्वस्त करें'
भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "हमे इस हमले से सदमा पहुँचा है. मुंबई हमले हों या फिर लाहौर में क्रिकेटरों पर हमला, जब तक पाकिस्तान और उसके नियंत्रण वाली ज़मीन पर आतंकवादियों का उपलब्ध मूलभूत ढांचा ध्वस्त नहीं होता तब तक ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकना मुश्किल है."
उनका कहना था, "अतंकवाद के मूलभूत ढांचे को ध्वस्त करने और इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को दंड दिलाने से ही इस समस्या का समाधान होगा."
प्रणब मुखर्जी ने ज़ोर देकर कहा, "आतंकवादी हमले दुनिया में विभिन्न जगहों पर हो रहे हैं. शीत युद्ध के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद दुनिया की शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है. ये अंतरराष्ट्रीय समस्य है इसलिए हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इसका संज्ञान लेगा. हम पाकिस्तान में सरकार और सभी संबंधित लोगों से दोबारा अनुरोध करेंगे कि इस समस्या से ध्यान हटाने की कोशिश न करें, इसका समाधान करें. "