मंगलवार, 03 मार्च, 2009 को 07:06 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के लाहौर शहर में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों पर हुए हमले की भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत दुनिया में अनेक देशों के नेताओं ने निंदा की है.
पाकिस्तान ने इसे देश की छवि ख़राब करने के मकसद के किया गया हमला कहा है और श्रीलंका ने इसे 'पाकिस्तान गए सदभावना के दूतों पर हमला' बताया है. भारत ने खिलाड़ियों की सुरक्षा पर चिंता जताई है.
मकसद बदनाम करना: पाकिस्तान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने भी लाहौर में श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर हुई गोलीबारी की कड़ी निंदा की है और इसकी तुरंत जाँच करने का आदेश दिया है.
प्रधानमंत्री ने कहा, "यह एक आतंकवादी हमला है जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को बदनाम करना है. हमने प्रांत के अधिकारियों को तुरंत सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने और इसकी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है."
प्रधानमंत्री गिलानी और राष्ट्रपति ज़रदारी ने श्रीलंका टीम के घायल सदस्यों और हमले में घायल दूसरे लोगों का बेहतर से बेहतर इलाज करने का निर्देश दिया है.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि इस हमले की तुरंत जाँच की जाए ताकि दोषियों को पहचान कर उनके इरादों का पता लगाया जा सके.
पाकिस्तान पंजाब के गवर्नर सलमान ताहसीर ने कहा है, "टीम सकते में है. लेकिन मैं इसकी पुष्टि करता हूँ कि खिलाड़ियों को कोई गंभीर चोट नहीं आई है. किसी भी खिलाड़ी की स्थिति नाज़ुक नहीं है."
बुज़दिलों की कार्रवाई: श्रीलंका
उधर नेपाल की यात्रा पर गए श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने वहाँ से अपने संदेश में इस हमले की निंदा की है.
उनका कहना था, "मैं बुज़दिल आतंकवादियों के इस हमले की निंदा करता हूँ जिसका निशाना श्रीलंका की टीम बनी है. श्रीलंका के ख़िलाड़ी पाकिस्तान में सदभावना के दूत बनकर गए थे. "
सुरक्षा अपर्याप्त थी: भारत
भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "यह चौंकाने वाली घटना है. स्पष्ट है कि जो सुरक्षा श्रीलंकाई टीम को प्रदान की गई वह अपर्याप्त थी. हम इस हमले की निंदा करते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि श्रीलंकाई खिलाड़ी सुरक्षित होंगे और जो घायल हुए हैं वे जल्द ही स्वस्थ हो जाएँगे."
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है - "पाकिस्तान में आतंकवाद पूरे विश्व के लिए ख़तरा है. यह पाकिस्तान के अपने हित में होगा कि वह वहाँ आतंकवाद के तंत्र को हमेश के लिए ध्वस्त करने के लिए जल्द से जल्द निर्णायक कदम उठाए."
भारत के विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने इसे एक चौंकाने वाली घटना बताया. उनका कहना था, "हमनें सोच-समझकर भारत की टीम को न भेजने का फ़ैसला किया था. भारत अपनी क्रिकेट टीम को किसी ख़तरे में नहीं डालना चाहता था. यह एक मुश्किल फ़ैसला था. ऐसा नहीं कि हम जनता के आपस में संपर्क के पीछे हट रहे थे."