मंगलवार, 03 मार्च, 2009 को 20:16 GMT तक के समाचार
हारून रशीद
बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
पाकिस्तान की सरकार की छवि पिछले कुछ समय से संदिग्ध ही रही है.
मंगलवार को हुए खिलाड़ियों पर हमले ने इस साख को नुकसान पहुँचाने की दिशा में एक और कड़ी जोड़ दी है.
अगर हम पिछले कुछ वर्षों की स्थिति को देखें तो यही नज़र आता है. हाँ, एक कोशिश पिछले साल से शुरू हुई थी जब पाकिस्तान में एक अर्से के बाद लोकतांत्रिक सरकार का गठन हुआ था.
माना जा रहा था कि लोकतंत्र की वापसी और नई सरकार की बहाली के बाद पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय जगत में छवि भी सुधरेगी.
पर पिछले एक साल के यानी इस सरकार के गठन के बाद से लेकर अभी तक के घटनाक्रम पर नज़र डालें तो दिखता है कि हालात इस एक साल के दौरान दिन ब दिन सरकार के हाथ से निकलते ही जा रहे हैं.
इस बात को लेकर चिंता पैदा हो रही है कि पाकिस्तान की स्थिति रोज़ गंभीर ही होती जा रही है.
अक्षमता
अब इस पूरे हालात में ऐसा को कम ही लगता है कि मौजूदा सरकार अपने दम पर चरमपंथियों से या जो हिंसक कट्टरवादी लोग हैं, उनसे निपट पाएगी.
मंगलवार की घटना से साफ़ हो गया है कि अब चरमपंथ की समस्या का दायरा और बढ़ता ही जा रहा है.
केवल ऐसा नहीं है कि कुछ ही ऐसे देश हैं जहाँ के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है बल्कि श्रीलंका जैसे देश के लोग भी अब निशाने पर हैं.
इसी बात पर गौर करके देखिए कि श्रीलंका की छवि एक निरपेक्ष देश की है. यानी जो न तीन में है और न तेरह में.
फिर भी पाकिस्तान की सरज़मी पर वहाँ के लोगों और वो भी खिलाड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है.
यानी मकसद यह नहीं है कि हमला किसपर किया जा रहा है, बल्कि कोशिश है कि इस हमले से प्रभावित कौन हो रहा है.
ज़ाहिर है, पाकिस्तान की सरकार इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रही है. जिस तरह से पिछले कुछ दिनों की और फिर मंगलवार की घटना सामने आई है उससे लगता है कि यह साजिश है पाकिस्तान की छवि के ख़िलाफ़.
साजिश का हिस्सा
दरअसल, पाकिस्तान एक बड़ीं साज़िश का हिस्सा बना दिया गया है. हमले करने वालों की कोशिश है कि कितना ज़्यादा से ज़्यादा पाकिस्तान की स्थिरता को प्रभावित किया सकता है.
अब यहाँ यह समझना होगा कि केवल पाकिस्तान की हुकूमत इस मसले से बाहर निकालने का काम नहीं कर सकती है. पूरे क्षेत्र को इस हक़ में पाकिस्तान की सरकार के साथ खड़ा होना होगा.
एक और अहम बात है और वो यह है कि पाकिस्तान के पड़ोस यानी अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेनाओं की मौजूदगी से क्या हालात पैदा हुए हैं.
ऐसे में अफ़ग़ानिस्तान को भी स्थिरता की ओर ले जाने की ज़रूरत है. तभी पूरे दक्षिण एशिया में शांति बहाली का काम शुरू हो सकता है.