गुरुवार, 26 फ़रवरी, 2009 को 15:00 GMT तक के समाचार
श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
भारत की 14वीं लोकसभा में गुरुवार को जब विदाई की बेला आई तो लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के साथ-साथ सत्तापक्ष और विपक्ष भी भावुक नज़र आए.
दिल के ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 14वीं लोकसभा के अंतिम दिन सदन में नहीं पहुँच पाए.
हालांकि प्रधानमंत्री ने अपना लिखित संदेश भेजा जिसे विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने पढ़ कर सुनाया.
मनमोहन सिंह ने लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों और विशेष तौर पर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की प्रशंसा की और अपनी सरकार की उपलब्धियाँ गिनाईं.
उपलब्धियों का बखान
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि पिछले पाँच साल में आम नागरिक के अधिकारों और उसकी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया गया है. इस दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के तहत हर घर को कम से कम 100 दिन काम उपलब्ध कराया गया.
असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को सुरक्षा देने वाला क़ानून बनाया गया, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए क़ानून और सूचना के अधिकार... ये वो कुछ काम हैं जो लोकसभा के पिछले पाँच साल की बड़ी उपलब्धियों में गिने जा सकते हैं.
14वीं लोकसभा के अंतिम सत्र के अंतिम दिन विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पिछले पाँच साल का आकलन की जगह विदाई भाषण की औपचारिकता निभाई. उन्होंने कहा कि भारत लगातार एक मज़बूत लोकतंत्र बना है.
लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी क़रीब 39 साल तक लोकसभा के सदस्य रहे, 11 महीनों का समय छोड़ दें तो वो 5वीं से 14वीं लोकसभा तक लगातार सांसद चुने जाते रहे.
अध्यक्ष के अनुभव
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वे आज न सिर्फ़ अध्यक्ष के तौर पर विदा ले रहे हैं बल्कि एक सांसद के तौर पर भी संसद में यह उनका अंतिम दिन होगा.
अपने कार्यकाल का आकलन करते हुए चटर्जी ने जहाँ अच्छे समय को याद किया वहीं अपने कुछ कड़वे अनुभव भी सदस्यों से बाँटे.
उन्होंने कहा कि सदन के मुखिया के तौर पर सदन की परंपरा और गरिमा को बनाए रखने के लिए उन्हें कई कष्टदायक फ़ैसले भी लेने पड़े.
सवाल के बदले पैसे लेने के मामले में 10 सांसदों को बर्खास्त किया गया. मानव तस्करी और सांसद नीधि के दुरुपयोग के आरोपों में भी सांसद निलंबित किए गए. विश्वास मत के दौरान सदन में नोट लहराए जाने को भी उन्होंने दुखद बताया.
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने उन मौक़ों का भी ज़िक्र किया जब न्यायपालिका और विधायिका के अधिकार क्षेत्र का मसला आया और उन्होंने आगे बढ़ कर इस मामले में पहल की और दोनों क्षेत्रों ने अपने दायरे तय किए.