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बुधवार, 18 फ़रवरी, 2009 को 05:56 GMT तक के समाचार

'तालेबान मानवीयता के लिए ख़तरा'

पाकिस्तान की स्वात घाटी में सरकार और तालेबान गुट के बीच हुए समझौते पर भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि तालेबान मानवीयता और सभ्यता के लिए ख़तरा हैं.

उन्होंने कहा है कि तालेबान आतंकवादी हैं.

उल्लेखनीय है कि पिछले सोमवार को पाकिस्तान सरकार और सूबा सरहद की स्वात घाटी में सक्रिय तालेबान गुट के बीच शांति समझौता हो गया था.

इस समझौते के तहत स्वात घाटी में अब इस्लामी शरिया क़ानून लागू हो सकेगा.

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमरीका सूबा सरहद में तालेबान से निपटने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा रहा है.

प्रतिक्रिया

विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से जब पाकिस्तान सरकार और तालेबान गुट के बीच हुए समझौते के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "यह तथ्य है कि तालेबान एक आतंकवादी संगठन के अलावा कुछ नहीं है और वे विनाश और हिंसा के अलावा किसी और चीज़ पर भरोसा नहीं करते."

दिल्ली में पत्रकारों से उन्होंने कहा, "मेरा आकलन है कि तालेबान मानवीयता और सभ्यता के लिए एक ख़तरा हैं."

प्रबण मुखर्जी ने एक तरह से वही बात कही है जो अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमरीकी राष्ट्रपति के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने कही थी.

दो दिन पहले अपने दिल्ली प्रवास के दौरान हॉलब्रुक ने कहा था कि पाकिस्तान में सक्रिय तालेबान पाकिस्तान, भारत और अमरीका के साझा दुश्मन हैं.

समझौता

एक समय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही स्वात घाटी के अधिकांश हिस्सों में तालेबान का नियंत्रण है.

वर्ष 2007 से इस इलाक़े में तालेबान के विद्रोह के कारण हज़ारों लोग पलायन कर चुके हैं और बड़ी संख्या में स्कूलों को भी नष्ट कर दिया गया है.

लेकिन पिछले रविवार को ही तालेबान ने स्वात घाटी में एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा कर दी थी. इसके बाद इलाक़े के अधिकारियों ने तालेबान से अपील की थी कि वो स्थायी रूप से अपने हथियार डाल दें.

सोमवार को सरकार की ओर से तालेबान गुट के साथ समझौते की घोषणा की गई.

सूबा सरहद के मुख्यमंत्री अमीर हुसैन होती ने घोषणा की थी कि एक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ है, जिसके तहत मालाकंड डिविज़न में नई 'न्याय व्यवस्था' लागू होगी.

मालाकंड डिविज़न में ही स्वात भी है.

इस समझौते के कारण पूरे इलाक़े में एक अलग न्याय व्यवस्था तैयार हो जाएगी.

बीबीसी संवाददाता मोहम्मद इल्यास ख़ान का कहना है कि तालेबान ने पहले से ही अपनी इस्लामी न्याय व्यवस्था तैयार कर रखी है.

महिला शिक्षा के ख़िलाफ़ उनके अभियान के कारण ही लाखों बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है.