रविवार, 15 फ़रवरी, 2009 को 17:36 GMT तक के समाचार
उमर फ़ारुक़
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
भारत में प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) के आंध्र प्रदेश इकाई के सचिव सांबासिवुदू ने रविवार को एक पुलिस अधिकारी के समझ आत्मसमर्पण कर दिया.
ये आत्मसमर्पण माओवादियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
दरअसल, सांबासिवुदू की शीर्ष माओवादी नेताओं से अनबन हो गई थी और उसके बाद वो भूमिगत हो गए थे.
ऐसी ख़बरें हैं कि तेलंगाना क्षेत्र के कुछ नेताओं ने मध्यस्थ की भूमिका अदा की और उन्होंने राज्य पुलिस के महानिदेशक- विशेष जाँच ब्यूरो शिवधर रेड्डी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.
सांबासिवुदू ने 1996 में महबूबनगर से अपने भूमिगत जीवन की शुरूआत एक कमांडर के रूप में की थी और जल्द ही वो शीर्ष नेताओं की श्रेणी में पहुँच गए थे.
उन्हें संगठन में अहम रणनीतिकार माना जाता है.
अक्तूबर, 2003 में तिरुमला घाट रोड पर तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर हमले की योजना में उनकी प्रमुख भूमिका मानी जाती है.
सरकार ने उन पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया हुआ था.
सांबासिवुदू कई अन्य अपराधों में शामिल रहे हैं.
इसमें कांग्रेस विधायक सी नरसी रेड्डी, उनके बेटे और आठ अन्य लोगों की 15 अगस्त, 1995 में महबूबनगर में हत्या शामिल है.
शीर्ष नेताओं की श्रेणी में आने से पहले वो दक्षिणी तेलंगाना के डिवीज़न सचिव थे.
आंध्र प्रदेश के हज़ारों किलोमीटर में फैले नल्लामल्ला जंगलों में उनका आधार शिविर था.
जुलाई, 2006 में माओवादियों के राज्य सचिव माधव और अन्य सात माओवादियों की एक मुठभेड़ में मौत के बाद उन्होंने सचिव का पद संभाला था.
राज्य के गृह मंत्री के जना रेड्डी ने उनके आत्मसमर्पण की पुष्टि की.
उन्हें सोमवार को अदालत में ले जाने से पहले मीडिया के समक्ष पेश किया जाएगा.