बुधवार, 11 फ़रवरी, 2009 को 10:51 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में आत्मघाती हमलावरों और कुछ बंदूकधारियों ने तीन सरकारी इमारतों को निशाना बनाया है. हमलों में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं और 50 घायल हुए हैं.
तालेबान के एक प्रवक्ता ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी लेते हुए बीबीसी को बताया कि अफ़ग़ानिस्तान की जेलों में तालेबान कैदियों के साथ दुर्व्यवहार के बदले में ये कार्रवाई की गई है.
पहले हमले में दो आत्मघाती हमलावरों ने जेल विभाग की एक इमारत में पहुँचकर विस्फोट किए.
दूसरी घटना में दो बंदूकधारी न्याय मंत्रालय में दाख़िल होते समय सुरक्षाकर्मियों को गिलियों का निशाना बने. लेकिन तीसरा हमलावर इमारत में दाख़िल हो गया और बाद में सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई में मारा गया.
एक समय तो न्याय मंत्री ख़ुद अपने दफ़्तर में बंद हो गए. उन्होंने बीबीसी को बताया कि वे सुरक्षित हैं लेकिन बाहर नहीं निकल सकते.
पुलिस सूत्रों के अनुसार अनेक पुलिस अधिकारी भी इन घटनाओं में मारे गए हैं.
एक छात्र असदुल्ला जगदालक ने बीबीसी को बताया कि वे न्याय मंत्रालय की इमारत के भीतर थे जब हमला हुआ और उन्होंने एक मेज़ के नीचे छिपकर अपनी जान बचाई.
उनका कहना था, "सुरक्षाकर्मियों ने गोलियाँ चलानी शुरु कर दीं और हमलावरों ने भी गोलियाँ चलाई जिसके कारण कई सुरक्षाकर्मी मारे गए. एक हमलावर इमारत में दाख़िल हो गया जबकि दूसरा इमारत के ऊपर चढ़ गया. हर कोई जान बचाने के लिए भाग रहा था, कोई शौचालय में घुस गया जबकि कुछ अन्य बाहर भाग गए या इमारत के ऊपर चढ़ गए."
कई आम लोग भी इन घटनाओं में मारे गए हैं या फिर घायल हुए हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसी चेतावनी दी गई थी कि तालेबान कोई बड़ा हमला करने जा रहे हैं.
उनके अनुसार ग़ौरतलब है कि ये हमले तब हुए हैं जब राष्ट्रपति हामिद करज़ई सत्ता छोड़ना चाह रहे हैं और तालेबान के साथ शांति वार्ता शुरु करना चाहते हैं.
'अतिरिक्त सैनिकों की ज़रूरत'
उधर अमरीका के ज्वाइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन एडमिरल माइक मुलन ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोहियों को भगा कर जिन इलाक़ों पर नियंत्रण कायम किया गया है, वहाँ तत्काल अतिरिक्त अमरीकी सैनिक तैनात किए जाने की ज़रूरत है.
कनाडा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस विषय में समय का महत्व है और ये बहुत ही नाज़ुक दौर है.
उनका कहना था कि केवल इलाक़ों को विद्रोहियों के कब्ज़े से मुक्त कराना ज़रूरी नहीं बल्कि उनपर नियंत्रण कायम रखना भी ज़रूरी है.
वॉशिंगटन में अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने इससे पहले कहा था कि राष्ट्रपति बराक ओबामा अगले कुछ दिनों में तय करेंगे कि अफ़ग़ानिस्तान में कितने अतिरिक्त सैनिक चाहिए.