मंगलवार, 03 फ़रवरी, 2009 को 06:51 GMT तक के समाचार
श्रीलंका में रेडक्रॉस का कहना है कि तमिल विद्रोहियों के इलाक़े के अस्पताल पर फिर से हमला किया गया है. इस हमले में छह लोग घायल हुए हैं.
एक स्वास्थ्यकर्मी ने बीबीसी को बताया कि मुलातिवु ज़िले के इस अस्पताल पर पिछले सप्ताहांत से अब तक इस अस्पताल पर यह तीसरा हमला था.
सरकार ने कहा है कि वह इस हमले के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
इस बीच श्रीलंका सरकार ने आम नागरिकों से कहा है कि वो उस इलाक़े से निकल जाएँ जहाँ तमिल विद्रोहियों से संघर्ष चल रहा है.
सरकार ने कहा है कि वह इन नागरिकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी नहीं ले सकती.
अनुमान है कि संघर्ष वाले इलाक़े में हज़ारों नागरिक फँसे हुए हैं.
अस्पताल पर हमला
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इससे पहले हुए हमले में गोले बच्चों के एक वॉर्ड में आकर गिरे थे.
अस्पताल के रसोईघर, चैपल और महिला में भी गोले आकर गिरे.
रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति की प्रवक्ता सोफ़ी रोमानेंस ने बताया कि अस्पताल परिसर में दागे गए गोले के कारण नौ लोग मारे गए और 20 अन्य घायल हो गए हैं.
उन्होंने कहा कि परिसर के बाहर भी कई लोग मारे गए हैं.
जिस गाँव के अस्तपताल पर हमला हुआ है वहाँ हज़ारों की संख्या में आम नागरिक हैं.
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता का कहना था कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों का उल्लंघन है.
फँसे हुए लोग
सहायता एजेंसियों का कहना है कि युद्ध क्षेत्र में फँसे लोग बुरे हाल में हैं और सैंकड़ों लोगों की जानें जा चुकी है.
लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि वहाँ फँसे हज़ारों लोग कैसे इलाक़े से निकल पाएँगे.
विद्रोही इस बात से इनकार कर रहे हैं कि वो लोगों को जाने से रोक रहे हैं.
श्रीलंका सेना का कहना है कि उसने 32 वर्ग किलोमीटर में बफ़र ज़ोन बनाया है ताकि नागरिक वहाँ आ सकें. लेकिन संवाददाताओं के मुताबिक यह 'सुरक्षित इलाक़ा' उस इलाक़े में है जहाँ विदोहियों का नियंत्रण है.
सेना ने एक और बयान में कहा है कि उन्हें एक बड़ा बंकर मिला है और उन्हें लगता है कि यह तमिल विद्रोहियों के नेता का ठिकाना था.
सेना के अनुसार दो मंज़िलों के इस बंकर में जेनरेटर लगा हुआ है, एसी हैं और दवाएँ मिली हैं.
लेकिन वहाँ तमिल विद्रोहियो के नेता वी प्रभाकरण का कोई सुराग नहीं मिला.
सेना और सरकार के अनुसार प्रभाकरण का अतापता नहीं है.