शुक्रवार, 30 जनवरी, 2009 को 12:21 GMT तक के समाचार
तमिलनाडु में सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने श्रीलंका सरकार की ओर से 48 घंटे के युद्धविराम की घोषणा पर कोई प्रतिक्रिया न देने के लिए एलटीटीई की आलोचना की है.
श्रीलंका की सरकार ने वन्नी क्षेत्र में जारी लड़ाई में फँसे तमिल लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 48 घंटे का समय देने की घोषणा की है. लेकिन एलटीटीई की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
चेन्नई में राज्य विधानसभा में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री और द्रमुक महासचिव के अन्बाज़गान ने एलटीटीई की आलोचना की और कहा कि अभी तक तमिलों को सुरक्षित निकालने के बारे में कुछ नहीं कहा गया है.
कांग्रेस सदस्य एस पीटर अलफांस के एक प्रस्ताव पर चर्चा में उन्होंने कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की युद्धविराम की घोषणा के बाद एलटीटीई प्रमुख वी प्रभाकरन और उनके साथियों ने कोई जवाब नहीं दिया है.
कोशिश
उन्होंने कहा, "अगर भारत के हस्तक्षेप के बाद श्रीलंका की सरकार ये कह सकती है कि वो तमिलों की सुरक्षा करेगी, तो एलटीटीई इस पर कोई जवाब क्यों नहीं दे रहा है."
अन्बाज़गान ने बताया कि कई लोगों ने एलटीटीई के क्षेत्र में इस आस में शरण ली थी कि वे ज़्यादा सुरक्षित हैं लेकिन दुर्भाग्य से श्रीलंका की सेना और एलटीटीई के बीच गोलीबारी में तमिल मारे जा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि हाल ही में विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी की श्रीलंका यात्रा तमिलों को बचाने की दिशा में पहला क़दम था. प्रणब मुखर्जी के दौरे के बाद ही राष्ट्रपति राजपक्षे ने अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की थी.
तमिलनाडु के वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को और कोशिश करनी चाहिए ताकि वहाँ रहने वाले तमिलों के लिए स्थायी शांति का माहौल स्थापित हो सके.