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बुधवार, 28 जनवरी, 2009 को 13:46 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, राजस्थान

मधुशाला पर लगेगा ताला

राजस्थान में नई बनी कांग्रेस सरकार ने राज्य में शराब की दुकानों की संख्या में कटौती कर दी है.

साथ ही, शराब की दुकानों और मयख़ानों पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर सरकार ने शराब की बिक्री को नियंत्रित करने की कोशिश की है.

सरकार को ज्यादा चिंता पबों को लेकर है, सरकार का कहना है कि पब राज्य के युवाओं को पथभ्रष्ट कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री अशोक गहलौत कहते हैं, "हम शराब की संस्कृति को प्रोत्साहित नहीं करेंगे, हम उस संस्कृति को ख़त्म करना चाहेंगे जिसमें लड़के लड़की हाथ में हाथ डालकर पब में जाते हैं".

सरकार की नई आबकारी नीति के तहत शराब पीने वालों को अब ज्यादा टैक्स देना होगा. सरकार ने शराब परोसने वाले होटलों और बारों की लाइसेंस फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है.

ताज़ा सरकारी फरमान से राज्य में शराब की 800 दुकानें बंद हो जाएँगीं. इससे पहले सरकार ने धार्मिक स्थलों और स्कूलों के करीब बनी लगभग 150 दुकानों को बंद करवा दिया था.

सरकार का कहना है कि शराब से होने वाली आमदनी का एक हिस्सा यानी 22 करोड़ रूपए गरीबों के इलाज और अवैध शराब बनाने वालों से निबटने पर ख़र्च किए जाएँगे.

राज्य में अवैध शराब बनाने के कारोबार में बड़ी संख्या में लोग लगे हुए हैं. ऐसी शराब कई बार विषाक्त साबित हुई है और पाँच सालों में लगभग 70 लोग इसकी भेंट चढ़ गए हैं.

राजस्थान में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में शराब नीति एक प्रमुख मुद्दा थी.

कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर शराब संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था लेकिन बीजेपी ने इसे बेबुनियाद बताया था.

राज्य में अभी अंग्रेजी शराब की लगभग 1800 दुकाने हैं. इनमें से अब 800 दुकानों को बंद करने का हुक्म दिया गया है. सरकार ने कहा है कि वो शराब संस्कृति को बढ़ावा नही देगी.

सरकार ने ऐसे समय पर क़दम उठाया है जबकि कर्नाटक में एक हिंदू संगठन ने एक पब पर हमला बोल दिया और वहाँ बैठी लड़कियों के साथ मारपीट की.