बुधवार, 28 जनवरी, 2009 को 03:44 GMT तक के समाचार
भारत ने श्रीलंका की सरकार से आश्वासन माँगा है कि उत्तरी श्रीलंका में सेना और तिमिल विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष के दौरान आम नागरिकों की रक्षा की जाएगी.
श्रीलंका के दौरे पर कोलंबो पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार देर रात राष्ट्रपति महेंदा राजपकक्षे के इस विषय पर चर्चा की है.
विदश मंत्रालय के बयान के मुताबिक मुखर्जी ने कहा कि 'सैन्य विजय से उत्तरी श्रीलंका में जन-जीवन सामान्य करने का राजनीतिक अवसर पैदा हुआ है, जिससे राष्ट्रपति राजपक्षे भी सहमत थे.'
अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था रेड क्रॉस के अनुसार इस संघर्ष में सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं और लगभग ढाई लाख लोग उस क्षेत्र में फँसे हुए हैं. रेड क्रॉस के अनुसार वहाँ एक मानवीय संकट पैदा हो गया है.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने आम नागरिकों की स्थिति पर चिंता जताई थी.
करुणानिधि, जयललिता को निमंत्रण
मुखर्जी ने राष्ट्रपति राजपक्षे से बातचीत के बाद कहा, "हमने अनुरोध किया है कि मूल प्रयास आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी मदद करने के होने चाहिए."
उधर राष्ट्रपति राजपक्षे ने इस चर्चा के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एस करुणानिधि और ऑल इंडिया अन्ना डीएमके की अध्यक्ष जयललिता को निमंत्रण दिया है कि वे तमिल नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ श्रीलंका आकर ख़ुद देश के उत्तरी भाग का दौरा करें.
इससे पहले तमिलनाडु में करुणानिधि की अध्यक्षता में ऑल पार्टी बैठक के बाद करुणानिधि ने भारत की केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि वह श्रीलंका में तमिलों की स्थिति के बारे में कदम नहीं उठाती तो वे सरकार से समर्थन वापस लेने पर विवश हो जाएँगे.
विदेश मंत्री मुखर्जी ने राष्ट्रपति राजपक्षे के साथ बातचीत उस समय की है जब उत्तरी श्रीलंका में सेना और तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के बीच अब भी कई जगह भीषण लड़ाई चल रही है.
कोलंबो में भारतीय दूतावास के अनुसार श्रीलंका की सरकार ने आश्वासन दिया है कि तमिल आम नागरिकों के लिए युद्धग्रस्त क्षेत्र में बनाई गई सुरक्षित ज़ोन या इलाक़ों को संघर्ष से बाहर रखा जाएगा.