रविवार, 25 जनवरी, 2009 को 01:39 GMT तक के समाचार
भारत की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में आंतकवाद निरोधक दस्ते यानी एटीएस के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध चरमपंथी मारे गए हैं.
इनके पास से हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए हैं.
गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले रविवार तड़के हुई इस मुठभेड़ के बारे में उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने बताया कि दोनों संदिग्ध चरमपंथियों का संबंध पाकिस्तान से हो सकता है.
उन्होंने पत्रकारों को बताया, " हमें मुठभेड़ स्थल से एक पाकिस्तानी पासपोर्ट मिला है. इसमें नाम अबू इस्माइल और पता रावलकोट, पाकिस्तान का है."
उनका कहना था कि एक चरमपंथी ने मरने से पहले बताया कि उसका नाम फ़ारूक़ था और वह ओकारा, पाकिस्तान का रहनेवाला था.
बृजलाल ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से दो एके-47 राइफल, पाँच हथगोले, डेटोनेटर, नौ आरडीएक्स के छड़ और 130 कारतूस बरामद किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि हथियारों के अलावा कुछ दस्तावेज़ भी बरामद हुए हैं जिनकी जाँच की जा रही है.
जब उनसे पूछा गया कि मारे गए संदिग्ध चरमपंथियों का संबंध किस गुट से था, तो उनका कहना था, "हमें कुछ टेलीफ़ोन नंबर मिले हैं. हम उस पर काम कर रहे हैं. जाँच के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है."
'गड़बड़ी फैलाने की साजिश'
एटीएस के पुलिस महानिरीक्षक एके जैन ने बीबीसी को बताया कि मारे गए 'चरमपंथियों' की योजना दिल्ली में गड़बड़ी फैलानी की थी.
मुठभेड़ के बारे में जानकारी देते हुए नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवीन अरोड़ा ने पत्रकारों को बताया कि एटीएस को सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग मारुति-800 गाड़ी में सवार होकर ग़ाज़ियाबाद में घूम रहे हैं.
एटीएस की टीम ने इनका पीछा किया तो ये लोग ग़ाज़ियाबाद से नोएडा की ओर भागे.
नोएडा के सेक्टर 97 में हाजीपुर गाँव के पास नोएडा पुलिस की मदद से एटीएस की टीम ने गाड़ी को रोका और उसमें सवार संदिग्धों को चुनौती दी.
लेकिन गाड़ी के अंदर से फ़ायरिंग शुरु हो गई जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की और उसमें सवार दोनों लोग मारे गए.
गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले हुई इस घटना को संवेदनशील माना जा रहा है.