गुरुवार, 22 जनवरी, 2009 को 16:47 GMT तक के समाचार
मोहम्मद फ़ैसल अली
बीबीसी संवाददाता
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य शासन को सिंगरम पुलिस 'मुठभेड़' मामले में गुरुवार को एक नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है.
कोर्ट ने यह नोटिस एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि विशेष पुलिस अधिकारियों या एसपीओ के एक दल ने सिंगरम और आसपास के कुछ गाँव के 19 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी और उनको ग़लत ढंग से नक्सली बताया जा रहा है.
एसपीओ वो लोग हैं जिन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस ने बस्तर इलाके में नक्सलियों से निबटने के लिए विशेष तौर पर नियुक्त किया है और उन्हें हथियार दिए गए हैं.
इस माह की आठ तारीख़ को दंतेवाड़ा ज़िले के सिंगरम गाँव के पास हुई इस घटना को पुलिस ने नक्सली-पुलिस मुठभेड़ बताया था और कहा था कि घटना में 17 लोग मरे गए थे.
लेकिन घटना के दूसरे दिन ही ग्रामीणों ने इस मुठभेड़ को फ़र्ज़ी बताया और इलाक़े में पहुँचने वाले कुछ पत्रकारों को मारे गए लोगों के शव भी दिखाए, जिनमें चार महिलाओं के शव भी थे.
इससे पहले भी सलवा जुड़ूम और एसपीओ की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं और इसे लेकर सर्वोच्च न्यायालय से लेकर योजना आयोग तक ने आपत्ति की है.
नोटिस
याचिकाकर्ता के वकील सौरभ डांगी ने कहा कि अदालत ने मौखिक तौर पर शासन से मारे गए लोगों का पोस्टमॉर्टम न किए जाने का कारण भी पूछा है.
हाईकोर्ट ने यह नोटिस राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, पुलिस अधीक्षक, दंतेवाड़ा और 18 एसपीओ को जारी किया है जिसकी सुनवाई आगामी गुरुवार को होगी.
मुठभेड़ में मारे गए 18 लोगों के परिवार वालों ने इन 18 एसपीओ को पहचानने का दावा किया है. एक शव की शिनाख्त गाँव वाले नहीं कर पा रहे हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि घटना के दिन सलवा जुडूम की करीब डेढ़ से दो सौ लोगों का एक दल गाँव में गया, लोगों के घर लूटपाट की और तेईस लोगों को बंधक बना कर ले गए और इन लोगों को एक कतार में खड़ा कर गोली मार दी.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन तेईस लोगों में से चार लोग भागने में कामयाब हो गए थे.
हालांकि पुलिस ने 17 नक्सलियों को मारने का दावा किया था लेकिन उन लोगों की शवों साथ मौजूद नहीं होने के प्रश्न पर कहा था कि चूँकि मुठभेड़ समाप्त होते-होते देर हो गई थी इसीलिए सुरक्षा बल के जवान शवों को घटना स्थल पर छोड़कर ही वापस आ गई.
मगर दूसरे दिन पुलिस वहां इतनी देर से पहुँची कि ग्रामीण शवों को लेकर जा चुके थे और इन शवों का पोस्टमॉर्टम भी नहीं हो पाया.
शासन के लोगों का कहना है कि वह अदालत के नोटिस पर फ़िलहाल कोई बयान इसीलिए नहीं दे सकते क्योंकि इस मामले में अभी जाँच जारी है.
छत्तीसगढ़ शासन ने जाँच के आदेश मुठभेड़ मामले के तूल पकड़ने के बाद दिए हैं.