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गुरुवार, 15 जनवरी, 2009 को 12:18 GMT तक के समाचार

महिलाओं की स्थिति चिंताजनक

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति वर्ष 78 हज़ार महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हो जाती है और इसका दो तिहाई हिस्सा उत्तर भारतीय राज्यों से आता है.

रिपोर्ट के अनुसार विकसित देशों की तुलना में कम विकसित देशों में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत की संभावना 300 गुना अधिक होती है.

इतना ही नहीं विकसित देशों की तुलना में कम विकसित देशों में
जन्म के एक वर्ष के अंदर बच्चों के मरने की संभावना 14 गुना अधिक होती है.

दुनिया भर में प्रसव के दौरान और कुछ समय बाद होने वाली मौतों का 99 प्रतिशत हिस्सा कम विकसित देशों से आता है.

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बाल आपात कोष यानी यूनीसेफ़ की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार प्रसव के दौरान जिन महिलाओं की मौत होती है उसक दो तिहाई हिस्सा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और असम से आता है.

रिपोर्ट के अनुसार बच्चों और गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य एक दूसरे से जुड़ा होता है. इस अवसर पर भारत में यूनीसेफ़ के प्रतिनिधि डॉ करिन हुलसॉफ का कहना था, '' भारत के कई हिस्सों में अभी भी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है. इन इलाक़ों में ये सुविधाएं पहुंचनी चाहिए.''

भारत सरकार के योजना आयोग की सदस्य डॉ सैयदा हामिद ने रिपोर्ट जारी करते हुए सभी पक्षों से आह्वान किया कि स्थिति में सुधार के लिए हरसंभव उपाय किए जाएं.

वैसे पिछले कुछ वर्षों में भारत में बच्चों के स्वास्थ्य के मामले में काफ़ी सुधार हुआ है. आकड़ों के अनुसार 1990 से 2007 की अवधि में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में काफ़ी कमी आई है.

हालांकि प्रसव के दौरान होने वाली मौतों में ऐसी कोई प्रगति नहीं हो सकी.