गुरुवार, 15 जनवरी, 2009 को 07:43 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
जी हाँ, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन को सत्ता पक्ष और विपक्ष ने कुछ इसी तरह के नाम दिए हैं.
बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा की प्रमुख मायावती गुरुवार को 53 वाँ जन्मदिन मना रही हैं.
लेकिन यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ज़ोर आज़माइश का अवसर बन गया है.
ये कथित चंदा वसूली के लिए इंजीनियर मनोज गुप्ता की हत्या के बाद शुरु हुई राजनीति का नतीजा है जिसमें बसपा विधायक शेखर तिवारी मुख्य अभियुक्त हैं.
भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने राजधानी लखनऊ में मायावती के नाम पर भीख माँगी है.
मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष दयाशंकर सिंह का कहना था, "...मायावती की भूख कम नहीं हुई है, इसलिए हम भीख में मिले पैसे मायावती को देंगे ताकि चंदा वसूली के लिए उत्पीड़न बंद हो सके."
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री इंजीनियर हत्याकांड की जाँच सीबीआई से कराने से कतरा रही हैं... उन्हें इस मामले में अपने विधायक की सदस्यता तुरंत ख़त्म करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ."
सरकार की सफाई
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इंजीनियर मनोज गुप्ता के परिवार वाले पुलिस की जाँच से संतुष्ट हैं और सीबीआई जाँच की ज़रूरत नहीं है.
वहीं दूसरी ओर विपक्ष पूरे मामले की जाँच सीबीआई से कराने की माँग पर अड़ा हुआ है.
राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) ने मायावती के जन्मदिन को थू-थू दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की है.
वहीं कांग्रेस इसे 'ललकार दिवस', लोक जनशक्ति पार्टी 'ख़ूनी दिवस' और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया इसे 'शोषित दिवस' के रुप में मना रही है.
विपक्षी हमले के जवाब में मायावती ने अपना जन्मदिन विपक्ष के लिए 'धिक्कार दिवस' के रुप में मना रही हैं और उन्होंने पार्टी की सभी ज़िला इकाइयों को इस अवसर पर रैली निकालने को कहा है.
सादगी
हालाँकि विपक्ष की लामबंदी और माहौल की नज़ाकत को समझते हुए मुख्यमंत्री ने धूमधाम के साथ जन्मदिन नहीं मनाने का फ़ैसला किया है.
मिली जानकारी के मुताबिक इस अवसर पर वो अपने सरकारी बंगले में कुछ कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करेंगी.
मायावती का कहना है कि वो अपना जन्मदिन आर्थिक सहयोग दिवस के रुप में मनाती हैं जिसे बेवजह तूल दिया जा रहा है.
हालाँकि हर विधानसभा से इस सहयोग की राशि अगर तीन लाख रूपए भी हो तो आँकड़ा 12 करोड़ रूपए का होता है जिसकी अधिकतम सीमा कोई नहीं है.
वो संभवत: देश की पहली ऐसी नेता हैं जो इस तरह के चंदे से मिले पैसे पर आयकर देती हैं, हालाँकि आयकर विभाग इस तौर तरीके पर आपत्ति जता चुका है.
विपक्ष का आरोप है कि मायावती ऐसा कर काला धन को सफेद बना रही हैं.