शनिवार, 10 जनवरी, 2009 को 03:17 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की परेशानियाँ घटती नज़र नहीं आती हैं. जयपुर की एक अदालत ने वसुंधरा राजे और भारतीय जनता पार्टी के कुछ अन्य नेताओं के विरुद्ध दीनदयाल उपाध्याय ट्रस्ट मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं.
आरोप लगाया गया है कि वसुंधरा राजे के कार्यकाल के दौरान ट्रस्ट को ज़मीन 'बेहद सस्ते' दाम पर दी गई. इस मामले में पुलिस को एफ़आईआर दर्ज करने को कहा गया है और फिर मामले में जाँच आगे बढ़ेगी.
ग़ौरतलब है कि पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने भी एक पत्र लिखकर वसुंधरा राजे के कार्यकाल के दौरान लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच की माँग की है.
उधर राजस्थान के मुंख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि कोई कार्रवाई बदले की भावना से नहीं होगी और जिन मामलों में क़ानून का उल्लंघन हुआ है उनमें न्यायिक प्रक्रिया के मुताबिक कार्रवाई होगी.
भाजपा का इनकार
जयपुर की अदालत ने आदेश शुक्रवार को एक वकील क्रिशन कुकर की याचिका की सुनवाई के बाद सुनाया.
कुकर ने आरोप लगाया था कि जब ट्रस्ट को ज़मीन देने का फ़ैसला हुआ और ख़ासे 'सस्ते दाम' पर ज़मीन दी गई, तब वसुंधरा राजे राज्य की मुख्यमंत्री भी थीं और दूसरी ट्रस्ट की चेयरपर्सन भी थीं.
कुकर के वकील अजय जैन ने बीबीसी को बताया की इस मामले में हाऊसिंग बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष अजयपाल सिंह, जयपुर के पूर्व मेयर अशोक परनामी और तत्कालीन नगर विकास मंत्री प्रताप सिंह और कुछ अन्य भाजपा नेताओं पर भी आरोप लगाए गए हैं.
जैन ने कहा की वे गत ढ़ाई साल से इस मामले में क़ानूनी कार्यवाही में जुटे हैं.
उधर भाजपा इन आरोपों को ग़लत बताती रही है. उनका कहना है कि उस समय की भाजपा सरकार ने विवाद खड़ा हो जाने पर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था.
वसुंधरा राजे, राजस्थान विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद, विधानसभा में विपक्ष की नेता हैं.