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बुधवार, 07 जनवरी, 2009 को 13:46 GMT तक के समाचार

दुर्भाग्यपूर्ण है पाक का इनकार: भारत

मुंबई पर हुए सुनियोजित चरमपंथी हमले के बारे में सौंपे गए सबूतों पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को भारत ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

भारत सरकार के एक प्रवक्ता ने नई दिल्ली में बुधवार को कहा, "हमने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का छह जनवरी का बयान देखा है."

प्रवक्ता ने कहा कि यह 'बहुत दुर्भाग्यपूर्ण' है कि पाकिस्तान ने पहले की ही तरह तथ्यों, सबूतों और वास्तविकता को नकार दिया है.

इनकार पर सवाल

मुंबई पर 26 नवंबर को हुए चरमपंथी हमले के बाद से ही पाकिस्तान सरकार भारत से हमले के सबूतों की माँग करता रहा है.

भारत सरकार की ओर से पाँच जनवरी को उसे सबूत सौंप दिए गए थे.

इसके 24 घंटे के भीतर ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने उन्हें सबूत मानने से ही इनकार कर दिया और कहा है कि भारत ने जो दस्तावेज़ दिए हैं वो सूचनाएँ हैं सबूत नहीं.

भारत सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान का यह इनकार कैसे विश्वसनीय हो सकता है जबकि इन सबूतों का वास्तविक परीक्षण या जाँच ही नहीं की गई.

प्रवक्ता ने इसे आधारहीन बताते हुए कहा कि यह 'एक राजनीतिक इनकार' है.

बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान में तथाकथित रचनात्मक प्रस्ताव की बात दोहराई गई है. जिसमें चरमपंथ से लड़ने के लिए नए तंत्र के विकास और उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे की बात कही जा रही है.

भारत सरकार का कहना है कि चरमपंथ विरोधी एक संयुक्त तंत्र पहले से ही उच्च स्तर पर काम कर रहा है जो कि पाकिस्तान के टालमटोल और खंडन के कारण सफल नहीं हो पा रहा है.

बयान में कहा गया है, "इसलिए अब तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि पाकिस्तान के इस नए प्रस्ताव का मतलब क्या है."

प्रवक्ता ने कहा कि शब्द, बयान या दक्षिण एशिया की स्थिति मुद्दा नहीं है बल्कि मुद्दा यह है कि भारत पर पाकिस्तान की ओर से हुए चरमपंथी हमले के बाद से पाकिस्तान ने किया क्या है.

सबूत नहीं सूचना

भारत की ओर से मुंबई हमले के सबूत के तौर पर पाकिस्तान को सौंपे गए सबूतों पर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ आई हैं.

पहली प्रतिक्रिया भारत में पाकिस्तान के राजदूत शाहिद मलिक ने कहा, "इसे खारिज करने या इसके बारे में कुछ और करने का अभी सवाल ही नहीं है, हमें जो सामग्री दी गई है हम उसकी पड़ताल कर रहे हैं."

वहीं पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर ने भारत के दस्तावेज़ों को सबूत मानने से इनकार करते हुए कहा, "भारत ने जो सामग्री दी है वह सूचना है, सबूत नहीं."