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बुधवार, 07 जनवरी, 2009 को 08:12 GMT तक के समाचार

बीनू जोशी
बीबीसी संवाददाता, जम्मू

पुंछ में सातवें दिन भी मुठभेड़ जारी

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के पुंछ में मंधार के घने जंगल में सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच मुठभेड़ सातवें दिन भी जारी है.

सेना के अनुसार ख़राब मौसम और पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से कार्रवाई में मुश्किल आ रही है.

बुधवार को पतितार में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ़ गुरदीप सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि चरमपंथियों की तरफ़ से मंगलवार की रात को गोलीबारी हुई थी और बुधवार की सुबह को भी दो बार फ़ायरिंग की गई है जो इस बात की ओर संकेत दे रहे हैं कि चरमपंथी अभी भी जंगल में मौजूद हैं.

संख्या मालूम नहीं

हालाँकि उनका कहना था कि ये कहना मुश्किल है कि जंगल में कितने चरमपंथी हो सकते हैं. उन्होंने बताया, " एक बात स्पष्ट है कि वहाँ कोई बंकर नहीं है और चरमपंथी प्राकृतिक गुफ़ाओं को अपने ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. "

ब्रिगेडियर गुरदीप सिंह ने बताया कि सिर्फ़ 350 सैनिक इस कार्रवाई के लिए इलाक़े में तैनात किए गए हैं जबकि मीडिया उसे बढ़ाचढ़ा कर बता रहा है. उनका कहना था कि अभी तक कमांडो को भी कार्रवाई में शामिल नहीं किया गया है.

गुरदीप सिंह के अनुसार हवाई कार्रवाई करने की कोई योजना नहीं है, "सेना ही इस कार्रवाई के लिए काफ़ी है, लेकिन ये बताना मुश्किल है कि ये कार्रवाई कब ख़त्म होगी."

उनका कहना है कि चरंपमथियों ने मंगलवार की शाम घेरा तोड़ने की कोशिश की, लेकिन सेना की फ़ायरिंग के बाद वो वापस जंगल में चले गए.

सेना ने पिछले सप्ताह चरमपंथियों के दो ठिकानों से भारी तादाद में हथियार, संचार उपकरण और खाने-पीने का सामान बरामद किया था.

इस कार्रवाई में अभी तक सात लोगों की मौत हो चुकी है जिसमें चार चरमपंथी और तीन सेना के जवान हैं.

सेना की उत्तरी कमांड के प्रवक्ता कर्नल डीके कचारी ने बताया कि अभी तक चरमपंथियों के शवों को बरामद नहीं किया जा सका है पर मोर्चे पर तैनात सैनिकों ने मारे गए चरमपंथियों के शवों को देखा है.

'देखना मुश्किल'

लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई चरमपंथी नहीं मारा गया है और उनके अनुसार जंगल इतना ऊँचा-नीचा और घना है कि कोई कुछ भी देख नहीं सकता.

हाल ही में संपन्न हुए राज्य विधानसभा चुनावों के बाद से सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच संघर्ष की यह पहली बड़ी घटना है.

आशंका व्यक्त की जा रही है कि सीमापार के चरमपंथी संगठनों, जैशे मोहम्मद और लश्करे तैबा के कुछ वरिष्ठ कमांडर इन जंगलों में छिपे हो सकते हैं.

मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच नियंत्रण रेखा के नज़दीक चल रही मुठभेड़ को अत्यंत गंभीर माना जा रहा है.

ग़ौरतलब है कि 12 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने जम्मू के एक होटल से पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन जैशे मोहम्मद के तीन चरमपंथियों को गिरफ़्तार करने का दावा किया था.